लिंगाई देवी मंदिर – यहाँ माता की पूजा शिवलिंग के रूप में होती है, मान्यता है कि खीरा खाने से होती हिं संतान की प्राप्ति

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lingai mata temple

हमारे देश में मंदिरों और तीर्थों की संख्या अनगिनत हैं ऐसे में बहुत से तीर्थ ऐसे भी है जो साधारण लोगों की पहुँच से आज भी दूर हैं I तीर्थों इन पवित्र मंदिरों तक लोगों की पहुँच न होने के पीछे कई कारण हैं जैसे कि कुछ ऐसे दुर्गम स्थानों पर है जहाँ पर लोगों का पहुँचाना असंभव हो जाता है तो कुछ विशेष कारणों की वजह से आम जनता से दूर है I

ऐसा ही एक मंदिर स्थित हैं छत्तीसगढ़ राज्य के आलोर गाँव में एक तो सबसे बड़ी बात है कि यह मंदिर नक्सल प्रभावित एरिया में आता इसीलिए भी लोगों की पहुँच से दूर है तो दूसरी बात यह भी हैं कि यह मंदिर साल में केवल एक ही बार खुलता है इसलिए भी यहाँ पर कम लोग ही पहुँच पाते है I इस मंदिर को लिंगाई माता के नाम से जाना जाता है और आपको बता दें कि यह मंदिर एक प्राकृतिक गुफा के भीतर स्थित है I इस मंदिर में कोई देवी की मूर्ती नहीं है बल्कि यहाँ पर एक प्रकृति निर्मित शिवलिंग है जिसे लोग कहते है कि देवी यहाँ पर शिवलिंग के रूप में विराजमान है I

 

साल में केवल एक ही बार खुलता है मंदिर –

गुफा के अन्दर निर्मित इस मंदिर का दरवाजा भी इतना संकरा है कि इस गुफा में आप केवल बैठ कर या फिर लेट कर ही जा सकते है इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है लेकिन मंदिर के भीतर पहुँच कर वहां कम से कम 20-25 लोग आसानी से बैठ सकते है I प्रतिवर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष नवमीं तिथि के पश्चात आने वाले बुधवार को इस प्राकृतिक देवालय को खोल दिया जाता है, तथा दिनभर श्रद्धालुओं द्वारा पूजा अर्चना एवं दर्शन की जाती है।

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स्थानीय लोगों की ऐसा मान्यता कि यहाँ पर उन लोगों की मुराद पूरी होती है जो संतान प्राप्ति के लिए यहाँ आते है I उन्हें खीरा अपने साथ लाना होता है और वह खीरा यहाँ चढ़ाया जाता है और पूजा के बाद उस खीरे को उस दंपत्ति को पुजारी वह खीरा वापस कर देता है I दंपत्ति को वह खीरा अपने नाखूनों से फाड़कर वही खाना होता है जिससे उन्हें संतान की प्राप्ति होती है I

 

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