पेट भरने के लिए सडकों पर खेल दिखा रहे छोटे-छोटे बच्चे

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 सुल्तानपुर(ब्यूरो)- पेट की भूख सब पर भारी पड़ती है यह तस्वीर कुछ ऐसा ही बयां कर रही है| छत्तीसगढ़ से पेट की भूख मिटाने को लेकर सफर कर रहे एक परिवार के इन मासूम सोनू-मोनू की दशा व्यवस्था को आइना दिखा रही है।
सुल्तानपुर जिला मुख्यालय से चंद किमी दूर के.एन. आई. टी. के समीप ठहरे बंजारों के इस कुनबे में सात लोग रहते है| सूरज की पहली किरण दिखते ही कुनबे के सभी सदस्य अपने अपने काम पर निकल जाते है। शहर के मुहल्ले-मुहल्ले और जिले की कस्बाई क्षेत्रो में ये अपने करतब दिखाकर सबका मनोरंजन करते है। बदले में इन्हे कुछ रूपए मिल जाते है और फिर शाम को डेरे पर वापस लौटते है| फिर अपनी अपनी कमाई का हिसाब कुनबे के मुखिया दौलत को देते है। दौलत के पुरे परिवार में उसकी पत्नी रमईता व उनके सोनू-मोनू सहित पांच बच्चे भी रहते है। इन परिवार की स्थिति ऐसी है कि रोज कुआँ खोदकर अपनी प्यास बुझा रहे है। इनके लिए स्वास्थ्य शिक्षा जैसी मूलभूत समस्याए कोई मुद्दा नहीं है मुद्दा है तो सिर्फ पेट की भूख मिटाना इन्हे इसके आगे शायद कुछ और नहीं सूझता।

रिपोर्ट- संतोष कुमार यादव
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