कच्ची शराब के निर्माण में प्रयोग गुड़ की बिक्री धड़ल्लें से जारी

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कुरावली (ब्यूरो) जनपद ही नहीं आस पास के जिलों में कच्ची शराब के निर्माण के लिए विख्यात गांव अलूपुरा में पहले के समय में शीरा से लहन तैयार कर कच्ची शराब का निर्माण किया जाता था। लेकिन पिछले समय में थाना पुलिस के द्वारा शीरा पर पूर्णतः रोक लगा देने के बाद अब शराब माफिया गुड़ से कच्ची शराब का निर्माण करनें पर उतारू हो गयें है। कच्ची शराब में प्रयोग किया जानें बाला गुढ़ कहीं और से नहीं वल्कि कस्बा से ही तस्करी करके मारूती बैन और ई रिक्शा, मोटर साइकिल आदि से शराब का निर्माण करनें बाले माफिया तक पहुॅचाया जा रहा है। गुड़ की सफ्लाई अधिक मात्रा में गांव तक पहुचायें जाने के कारण कच्ची शराब के निर्माण पर रोक नहीं लग पा रहीं है।

कच्ची शराब का धन्धा क्षेत्र के गांव तिमनुपरा, शहादतपुर, उम्मेदपुर सहित कई गांवो में दिन दूना रात चैगुना तरक्की कर चुका है। जिस पर रोक लगाना पुलिस के मुश्किल ही नहीं किसी चुनौती से कम नहीं है। कच्ची शराब के निर्माण में गुड़ के अबैध धन्धे ने चार चांद लगा दियें है। कस्बा से कच्ची शराब में प्रयोग होने बाला गुड़ सैकड़ो कुन्टल मात्रा में रोजाना सफ्लाई करके भेजा है। नगर में गुड़ का अबैध तरीके से भंडारण भी किया जा रहा है। अबैध रूप से भंडारण करने के बाद तस्करी करके भेजे जाने बाले गुड़ के कारण लाइसेन्स लेकर गुड़ का धन्धा करने बालो के धन्धे मानो ठप से हो गयें है। गुड़ बेचने के लिए लाइसेन्स लेकर बैठे दुकानदारों पर ग्रहण सा लग गया है। अबैध रूप से गुड़ का धन्धा करनें बालों ने अपनी दुकानों में कई टन गुड़ का भंडारण कर रखा है। भारी मात्रा में गुड़ का भंडारण होने के बाद भी पुलिस की निगाह इस ओर नहीं जाती है। पुलिस के द्वारा अबैध रूप से चल रहे इस गोरख धन्धे पर रोक लगाना आखिर किस लिए मुश्किल हो रहा है।

रिपोर्ट – दीपक शर्मा

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