लोगों को धधकती आग से बचाने बाले खुद कितने महफूज

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किशनी/मैनपुरी (ब्यूरो)-
कहीं आग लगी तो और भैंस कुयें में गिरी तो और भी कोई समस्या हुई तो लोग सबसे पहले फायर ब्रिगेड को ही फोन कर मदद की गुहार लगाते हैं। दमकल विभाग भी बडी सर्तकता के साथ इन सारी अपदाओं के बीच लोगों की मदद करने को तैयार दिखता है। पर इसे विभाग की अनदेखी कहा जाय या कुछ और कि गत दस वर्षों से उपेक्षित जीवन जीने को मजबूर दमकल कर्मी किशनी के टूटे-फूटे और जर्जर आवासों में रह कर अपने कर्तब्यों को अंजाम दे रहे हैं।

सपा संरक्षक मुलायमसिंह यादव के मुख्यमन्त्रित्व काल के दौरान स्थानीय लोगों की मांग पर किशनी में दमकल विभाग का आगाज हुआ। रहने के लिये आवास उपलब्ध न होने के कारण इन कर्मियों को विकासखंड कार्यालय के कर्मियों के लिये बनाये गयें आवासों में ठहरा दिया गया था।

इसके बाद किशनी के ही एक मैदान में इन कर्मियों के लिये कार्यालय, पानी का तालाव, वाहन स्टैंड तथा कर्मियों के लिये आवास इत्यादि का काम शुरू कर दिया गया। कुछ समय बाद सपा सरकार सत्ता से हट गई और इसी के साथ यह योजना भी खटाई में पड गई। आज स्थिति यह है कि ये आवास आज दस सालों के बाद भी अधूरे बने खडे हैं। वाउन्ड्री वाल कई जगह गिर कर ध्वस्त हो चुकी है। आवास अराजक तत्वों के लिये सुरक्षित ठिकाने बन चुके हैं।

दमकल कर्मियों का हाल यह है किे इनके पास पर्याप्त संख्या वल तक उपलब्ध नहीं है।फायर फायटर्स की संख्या भी अधिकृत से आधी ही है। इनको कुक की सुविधा भी नहीं दी गई है इस कारण इन्है पेट की आग शांत करने के लिये स्वयं ही चूल्हे पर खाना बनाना पड रहा है। कई बार येसा भी होता है कि ये लोग रोटी बनाने के लिये आटा मढ रहे होते हैं और आग लगने की खबर सुन कर इन्हैं चूल्हा बुझाना पडता है।लाखों की कीमत का वाहन गैरिज न होने के कारण खुले में खडा करना पड रहा है।वाहन में पानी भरना भी इन लोगों केे लिये किसी मुशीबत से कम नहीं है। अक्सर ये लोग पानी नगर पंचायत कार्यालय में लगी सवमर्सिवल से भर लेते हैं। पर कार्यालय बन्द होने की स्थिति में इनको ताल पोखरों का सहारा लेना पता है। बडी ही अजीब सी स्थिति है किशनी के दमकल कर्मियों की।

स्वयं का फायर स्टेशन होता तो हमारा अलग ही उत्साह होता –
लीडिंग फायर मैन प्रेमचन्द्र पुष्कर के अनुसार यदि हमारे विभाग का स्वयं का फायर स्टेशन होता तो हमारा अलग ही उत्साह होता। हमें जों ट्रेनिंग दी गई है हम सभी उसी के अनुरूप कार्य करते है। परन्तु परेशानियां तो हैं। सफाई कर्मी है नहीं। फाॅलोवर भी नहीं हैं। अन्य कर्मियों की भी भारी कमी है। यदि हमारा फायर स्टेशन होता तो हम आग बुझाने में और भी शीघ्रता दिखा सकते थे। क्योंकि वहां पर पानी भरने की अच्छी सुविधा होतीं। हम लोग आवासों में अपने बच्चों के साथ भी रह सकते थे। हमारी गाडी खुले में खडी रहती है। बुरा तो लगता है पर कुछ कर नहीं सकते।

सुविधाओ के प्रति विभाग ही असंबेदनशील-
कस्वा निवासी सुधीर गुप्ता, रमेश चन्द्र गुप्ता, आकाश चैहान, बाॅबी भदौरिया, हरिओम गुप्ता, राजा दुबे आदि का कहना है कि जब विभाग के लिये जगह निश्चित हो चुकी है और काम भी शुरू हो गया था। तो इसे पूरा होना ही चाहिए था। आग लगने के बाद लोग दमकल विभाग को कोसते हैं। पर उनकी सुविधाओं के प्रति विभाग ही असंवेदनशील है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर गुप्ता के अनुसार वह गत सप्ताह इसी काम के लिये लखनऊ गये थे और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मिले थे। उन्होंने किशनी के फायर स्टेशन के अधूरे काम को पूरा कराने का आश्वासन भी दिया है।

रिपोर्ट- दीपक शर्मा

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