बोफोर्स कांड पर 17 घंटों से भी ज्यादा संसद को चलवाने वाले दिग्गज नेता का निधन

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दिल्ली- पूर्व लोकसभा अध्यक्ष, पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल जैसे अनेकों गौरव शाली पदों पर रहने वाले दिग्गज नेता बलराम जाखड का आज निधन हो गया है । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सहित राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलराम जाखड़ के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह एक लोकप्रिय नेता थे, जिन्होंने संसदीय लोकतंत्र को समृद्ध बनाया।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, “बलराम जाखड़ जी एक लोकप्रिय नेता थे, जिन्होंने अपनी लंबी राजनीतिक यात्रा में हमारे संसदीय लोकतंत्र को समृद्ध बनाया… मैं उनके निधन से दु:खी हूं… ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे…”
आपको बता दें कि बलराम जाखड, “वर्ष 1980 से 1989 तक लगातार लोकसभा के अध्यक्ष भी रहे थे । इसके अलावा बलराम जाखड ने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के कैबिनेट में कृषिमंत्री के तौर पर भी सेवाएं दीं। बलराम जाखड़ 30 जून, 2004 से 30 मई, 2009 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी रहे।

महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर करवाई थी बहस – 17 घंटे से भी ज्यादा चलवाई थी संसद
डॉक्टर बलराम जाखड़ ने लोकसभा अध्यक्ष रहते कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक बहस करवाई थी।  इन्ही में से एक था चर्चित बोफोर्स मामला। देश के लिए बेहद  महत्वपूर्ण इस  मुद्दे पर जाखड़ ने 17 घंटे से भी ज़्यादा तक बहस करवाई थी।

जाखड़  संसद या विधानसभाओं की सदनों में सदस्यों के शोर-शराबे को लेकर हमेशा ही चिंतित रहते थे। कई बार उन्होंने मीडिया से इस बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए नाराज़गी जताई थी।  वे कहते थे कि सदस्यों को हंगामा या शोरगुल करने के बजाये किसी भी मसले पर सार्थक बहस कर निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।

कृषि क्षेत्र में रहा अतुलनीय योगदान
लोकसभा अध्यक्ष, राज्यपाल और केंद्रीय कृषि मंत्री जैसे प्रमुख पदों पर रहे दिग्गज राजनीतिज्ञ डॉक्टर बलराम जाखड़ का कृषि क्षेत्र को दिया योगदान कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। खेतों में पैदावार बढ़ाने के लिए उन्नत और वैज्ञानिक तकनीकों को काम में लिए जाने को लेकर जाखड़ हमेशा ही कोशिशों में जुटे रहते थे। कृषि क्षेत्र में जाखड़ का यह अभूतपूर्व योगदान ही था जिसकी वजह से उन्हें एक अलग ही पहचान मिली। जाखड़ के इन्ही प्रयासों की वजह से उन्हें बागवानी क्षेत्र में योगदान के लिए 1975 में राष्ट्रपति ने उद्यान पंडित की उपाधि से नवाज़ा। यही नहीं हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार और गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार ने उन्हें ‘डॉक्टर ऑफ़ साईंस’ और ‘विद्य मार्तण्ड’ की मानद उपाधि से भी नवाज़ा।

हाल ही में एफडीआई का खुलकर किया था समर्थन –
कृषि और किसानों से जुड़े डॉक्टर जाखड़ ने भारत में विदेशी निवेश को खुलकर समर्थन किया था। उनकी दलील थी कि एफडीआई से किसानों का ही नहीं बल्कि हर वर्ग का हिट ही होगा। आपको यह भी बता दें कि वे पहले एशियाई मूल के राजनीतिज्ञ जिन्हें राष्ट्रमंडल संसदीय फोरम का चेयरमेन चुने जाने का गौरव हासिल हुआ।

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