जब सरकार हुई बहरी तो गाँव वालों ने खुद ही बनाया 1 करोड़ 25 लाख का पुल

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आज़ादी से लेकर अब तक देवी दयाल से लेकर मनोहर लाल खट्टर तक सभी के पास ये गाँव वाले अपनी फ़रियाद लेकर गये पर किसी ने भी उनकी कोई मदद नही की तो गाँव वालों ने खुद ही मिलकर ये बीड़ा उठाने की सोच ली |

हरियाणा के सिरसा जिले में अलीका और पनिहारी जैसे गाँव सालों से घग्गर नदी पर पुल की अपनी अर्जी को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, क्योंकि गाँव वालों को अपना अनाज गाँव से सिरसा जिले तक ले जाने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था अगर नदी को नाव से पार करके सिरसा तक जाने की सोंचे तो दुर्घटना का खतरा रहता था और यदि तत्कालीन मौजूद रास्तों का प्रयोग करें तो 30 किमी की अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ती थी, पिछले साल नाव से नदी पार करते समय दो लड़कों की मौत के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई अंत में गाँव वालों ने खुद ही पैसा इकठ्ठा करके पुल बनाने की ठान ली |

sirsa bridge

पहले तो सिर्फ अलीका और पनिहारी गांवों ने ही शुरुवात की पर जैसे ही अन्य गाँव को इसकी जानकारी मिली आस – पास के अन्य गाँव ने सहयोग करना शुरू दिया, गाँव वालों ने एक इंजीनियर की मदद से नदी पर 214  फीट लम्बा और 16 फीट चौड़ा ब्रिज बनाया जिसके लिए सभी गाँव वालों ने मिलकर करीब 1 करोड़ 25 लाख रुपए खर्च किये पुल का काम लगभग समाप्त होने वाला है |

पुल बन जाने के बाद गाँव के लिए सिरसा के साथ – साथ पंजाब के अन्य बाजारों तक पहुँच भी आसान हो गयी है |
अपने इस प्रयास से गाँव वालों ने हमारी सोती हुई सरकारों को सीधा सन्देश दिया है कि आम नागरिक अब सरकारों पर निर्भर नही रहेगा और वक़्त आने पर अपने अधिकारों और क्षमताओं का पूरा उपयोग करेगा |

अखंड भारत परिवार गाँव वालों के इस प्रयास की भरसक सराहना करता है और उनकी सफलता के लिए उन्हें हार्दिक बधाइयाँ देता है |

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