कैग ने खोल दी अखिलेश सरकार की पोल, 20 करोंड का बेरोजगारी भत्ता बांटने में दिखाया 15 करोंड का खर्च

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नई दिल्ली – उत्तर प्रदेश के पूर्वमुख्यमंत्री अखिलेश यादव व उनकी पूर्ववर्ती सरकार को देश की प्रतिष्ठित संस्था कैग ने बड़ा झटका दिया है | आपको बता दें कि कैग ने खुलासा किया है कि अखिलेश सरकार ने 20.58 करोंड रूपये का बेरोजगारी भत्ता बांटने के लिए जो वितरण कार्यक्रम आयोजित किया था उसमें 15 करोंड रूपये की धनराशि खर्च कर दी है | कैग के अनुसार इस धनराशि को फालतू में खर्च किया गया है इसे आसानी से बचाया जा सकता था |

लोकप्रियता हासिल करने और पुनः सत्ता वापसी के लिए किया गया था खर्च-
बता दें कि अक्सर यह देखा गया है कि अखिलेश सरकार अपनी एडवरटाइजिंग करने का कोई भी बहाना नहीं छोडती थी | जब भी और जहाँ भी पूर्व सरकार को मौका मिला था उसने अपनी जमकर ब्रांडिंग की | इसके पीछे अखिलेश सरकार का जो सबसे बड़ा मकसद था वह यह कि वह जनता के बीच लोकप्रियता हासिल करना चाहती थी जिसकी दम पर वह सूबे में पुनः सरकार बना सके | लेकिन घटना क्रम कुछ इस तरह से बदला की सत्ता में अमूल चूल परिवर्तन हो गए |

2012-2013 में हुआ यह मामला-
बताते चले कि अखिलेश सरकार ने वर्ष 2012-2013 में सूबे के बेरोजगारों को भत्ता देने के लिए 20.58 करोंड रूपये खर्च करने का प्लान तैयार किया था | इस धनराशि को सम्बंधित लोगों तक पहुंचाने के लिए जो कार्यक्रम सरकार द्वारा चलाया गया था उसमें सूबे की सरकार ने 15.06 करोंड रूपये खर्च कर दिए थे | जबकि यह भी बता देते है कि इसके लिए कोई कार्यक्रम की आवश्यकता ही नहीं थी यह पैसा सीह्दे लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा किया जा सकता था | ये जानकारी गुरुवार को उत्तर प्रदेश विधान सभा में पेश की गयी कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (कैग) की जनरल एंड सोशल सेक्टर रिपोर्ट में सामने आयी है

नास्ते-पानी और लाभार्थियों को लाने जाने में बर्बाद किये 15 करोंड –
कैग की रिपोर्ट में इस बात खुलासा हुआ है कि अखिलेश सरकार ने वर्ष 2012-2013 में बेरोजगारी भत्ता वितरण आयोजित कार्यक्रमों में 8.07 करोड़ रुपये कुर्सियों, नाश्ते-पानी और दूसरे इंतजामों पर खर्च किए | 6.99 करोड़ रुपये लाभार्थियों को कार्यक्रम स्थल तक लाने में खर्च हुए | कार्यक्रम में 1.26 लाख बेरोजगार लोगों को भत्ते के चेक दिये गये, ये चेक खुद राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने हाथों से दिया | कैग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि चूंकि बेरोजगारी भत्ता योजना के राज्य के 69 जिलों के लाभार्थियों को पैसा सीधे उनके बैंक खाते में भेजा जाना था इसलिए चेक बांटने के लिए कार्यक्रम को टालकर इस खर्च से बचा जा सकता था |

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