नागपंचमी पर कहीं जलती तो कही बुझती दिखी परम्परा, युवाआें मे नही दिख रहा पचईंयां का उत्साह

बलिया (ब्यूरो)- कभी युवाआें के लिये सबसे उत्साही त्याैहार के रूप में ख्याति प्राप्त पचईंयां जो हर वर्ष सावन माह के नागपंचमी के शुभ अवसर पर मनाया जाता है। गांव गिरांव के लोग एक दो महीने पहले से ही कुश्ती में आैर ज्यादा मेहनत करने लगते थे, लेकिन आज के वर्तमान परिवेश में युवा वर्ग कुश्ती करना तो दूर अखाड़े के पास भी नही भटकते। जिससे पुरानी परम्परा अब विलुप्त होने के कगार पर आ चुकी है।

इसी में कुछ एक जगहों पर बुजुर्गों की मेहनत आैर लगन से कम संख्या मे ही सही पर ये परम्परा अभी चल रही है। शुक्रवार के दिन पचईंयां के शुभ अवसर पर क्षेत्र के उजियार मे प्रत्येक वर्ष की भांति इस साल भी पारम्परिक कुश्ती हुई। जिसमें उजियार, सरया, अमांव, सारीपुर (बक्सर बिहार) के पहलवानों ने अपना करतब दिखाया।

सुबह दस बजे से शुरू होकर कुश्ती दोपहर के दो बजे तक चली। इसके बाद अखाड़े की परम्परा के अनुसार बजरंगबली के जयकारे के साथ प्रसाद वितरण करके कार्यक्रम का समापन किया गया। वहीं सरया गांव में भी परम्परा का निर्वहन किया गया। इस दाैरान दर्शकों का भी काफी जमावड़ा लगा रहा। गांव के बुजुर्गों का यही प्रयास है कि किसी तरह से इस परम्परा को युवाआें में जागृत किया जाय। इस दाैरान गांव के रणजीत राय, शिवबहादुर यादव, विनोद राय, कमला राय, अतुल राय, अंगद राय, भूषण राय, रामप्रवेश यादव, संजय राय समेत काफी संख्या में लोग जमे रहे|

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here