समाज या प्रशासन: किसे मानें मासूम रिया की मौत का दोषी

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मैनपुरी(ब्यूरो)- हालाँकि पुलिस ने अभी तक 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की है| 30 से अधिक अभी भी पुलिस हिरासत में हैं| क्राइम ब्रान्चए स्वाट टीम एसर्विलांस टीमएएल आईयू आदि टीमों को लगाकर एस पी एएसपी खुद पूरे मामले की मोनिटरिंग कर रहे हैं| सवाल है कि क्या रिया को उसकी दुष्कर्म के बाद हत्या से पहले ही ढूंढा जा सकता था जबाब है आपके पास है लेकिन पहले पूरे घटनाक्रम को जान लेना जरूरी है|

दअरसल रोज की तरह रिया गोलाबाजार स्थित अपने घर से स्कूल के लिए निकली थी| घर से स्कूल जाने के लिए दो रास्ते जाते हैं जिनकी दूरी बहुत कम व लगभग बराबर ही है और दोनों ही रास्ते व्यस्त रहते हैं| ऐसे में जब रिया स्कूल से पढ़कर बाहर निकली तो ठीक सामने एक परचून की दुकान से उसने टॉफी खरीदी| दुकानदार वो पहला शख्श था, जिसने रिया से अंतिम बार बात की| दूसरी प्रत्यक्षदर्शी रिया के घर से महज 20 कदम की दूरी पर एक महिला थी, जिसने आखिरी बार रिया को देखा था| अब सवाल यह उठता है कि घर से चन्द कदम की दूरी से रिया गयी कहाँ? रोजाना की तरह जब रिया घर नही पहुँची तो परेशान हो कर मां ने छानबीन शुरू की लेकिन पता नही चला|

पीड़ित मां ने डायल 100 को सूचना दी जिसके बाद पुलिस कर्मियों ने वहाँ पहुंचकर महिला से बच्ची को नाले आदि में ढूंढनें को कहा और औपचारिकता पूरी कर 10 मिनट में चलते बने| आस-पास के लोगों ने मीडिया को सूचना दी, जिसके बाद मामले की जानकारी शहर कोतवाल को दी गयी तो उनका जबाव डायल 100 के पुलिसकर्मियों से भी ज्यादा निराश कर देने वाला था| मीडिया द्वारा मामले की गम्भीरता को समझते हुए एएसपी ओमप्रकाश सिंह को सूचना दी गयी, जिन्होंने बिना विलम्ब किये मौके पर पहुंच बच्ची की तलाश शुरू की|

जानकारी करने पर पता चला कि स्कूल से महज 20 कदम की दूरी पर एक जज साहब के निजी आवास पर सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है| तमाम अथक प्रयासों के बाबजूद जज साहब फुटेज दिखाने को राजी नही हुए| इस बीच रात 12 बजे तक अपर पुलिस अधीक्षक बच्ची की तलाश करते रहे लेकिन सफलता नही मिली| दूसरी ओर पूरे घटनाक्रम की जानकारी व्हाट्सअप पर डाली जाती रही, जिससे सहयोग की अपेक्षा बढ़ती नजर आ रही थी लेकिन लोंगों ने मामले की गम्भीरता को समझ कर जानकारी करना तो दूर उल्टा खबर डालने वाले मीडियाकर्मी को एएसपी की तपलमंजिनी कम करने की नसीहत दे डाली| घटना वाले दिन के देर रात के बाद अब इंतजार था अनोहोनी का, जो हुई भी फिर क्या था पुलिस के मुखिया जनपद की तमाम पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गए, मीडिया भी कोने कोने से एकत्र हो गई| शाम होते होते 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई दर्जनों अभी भी पुलिस हिरासत में हैं|

अब सवाल यह उठता है दोषी कौन है? मासूम रिया के वो गरीब माँ बाप जो उसे अकेले स्कूल भेजते थे या वो सिपाही जिसने फफक फफक कर रो रही माँ से बच्ची को नाले में ढूंढने को कहा| वो मीडियाकर्मी जिसने मामले को तूल सिर्फ इस लिए दिया कि गायब हुई मासूम बच्ची कहीं दरिन्दगी का शिकार न बन जाये, या वे जज साहब जिन्होंने सीसीटीवी फुटेज देने से इनकार कर दिया था, या वो पुलिस अधिकारी जो रात 12 बजे तक बच्ची की तलाश करते रहे या हम सब जो इन्तजार कर रहे थे कि कब अनहोनी की सूचना मिले|काश वो कैंडिल मार्च उसी रात को निकाल लिया होता, जिस रात रिया गायब हुई, काश ये राजनेता उसी दिन उसके घर पहुंचे होते, काश ये तमाम पुलिस महकमा उसी रात 100 लोगों से पूछताछ कर लेता तो आज उस मासूम के साथ जिस घिनोने तरीके से दुष्कर्म किया गया पेचकस और तेजाब से जैसी चीजों से हत्या को अंजाम दिया गया वो किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकता है शायद ऐसा न होता |

रिपोर्ट- दीपक मिश्रा 

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