मद्रास हाई कोर्ट ने वापस ले लिया अपना फैसला, कहा था रेपिस्ट और पीड़ित को आपस में समझौता करने के लिए

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rape victimमद्रास हाईकोर्ट ने कुछ दिनों पहले एक चर्चित रेप के मामले में विवादित फैसला सुना दिया था I मद्रास हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश में हाईकोर्ट ने एक बलात्कारी ब्यक्ति और रेप विक्टिम के बीच मध्यस्थता करने का निर्देश दिया था I और इसी कारण से मद्रास हाईकोर्ट ने बलात्कार करने वाले ब्यक्ति को जमानत पर रिहा भी कर दिया था लेकिन जैसे रेप विक्टिम ने इस फैसले के बारे में सुना तब उस लड़की ने इस कडा विरोध किया था और साथ ही मद्रास हाईकोर्ट से यह अपील भी की थी कि वह अपने द्वारा दिए गए इस फैसले को वापस लेने की कृपा करें I

बाद में मद्रास हाईकोर्ट के जज पी. देवदास द्वारा दिए गए इस फैसले का कानून के जानकारों ने विरोध भी किया था और यह भी कहा गया था कि यह फैसला एक महिला के सम्मान के खिलाफ हैं I मद्रास हाईकोर्ट के द्वारा दिए गए इस फैसले के आने के कुछ ही दिनों के भीतर ही भारत क सर्वोच्च न्यायालय ने मध्य-प्रदेश के एक इसी तरह के मामले में सुनवाई करते हुए यह कहा था कि महिलाओं का शरीर मंदिर के समान होता हैं और इनके साथ किये गए किसी भी प्रकार के अपराध करने वाले अपराधी के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता हैं I

उसके बाद आज शनिवार को मद्रास हाईकोर्ट ने अपना फैसला वापस लेते हुए अपराधी वी. मोहन लाल जिसने 2002 में एक 14 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार किया था और जो बाद में माँ भी बन गयी थी I तब से वह उस बच्ची को अकेले ही संभाल रही थी I के मामले में दिए गए अपने फैसले को वापस ले लिया हैं और साथ ही यह आदेश भी जारी किया हैं कि अपराधी वी. मोहन लाल को अगामी 13 जुलाई तक ही अपने आपको सरेंडर करना होगा I

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