नगर पंचायत महराजगंज में ईओ का है इन्तजार

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रायबरेली(ब्यूरो)- प्रदेश की योगी सरकार जहां जनता दरबार लगाकर लोगों की जन सुनवाई कर रही है वहीं योगी राज़ में मातहत सरकार को ठेंगा दिखाने में पूरी कसर लगाए हुए है। यहां निजाम भले ही बदल गया हो लेकिन साहिब का कायदा कानून नही बदला। सभासदगण साहिब की कार्यशैली से क्षुब्ध होकर अपने-अपने पद से इस्तीफे का ज्ञापन भी अध्यक्ष को सौंप दिया किंतु जनमानस एवं सभासदों की समस्या का निराकरण न हो सका।

बात हो रही है 16/11/2013 से नगर पंचायत महराजगंज में सम्बद्ध अधिशासी अधिकारी सुरेश कुमार मौर्य की। बताते चले की पिछले साढ़े तीन वर्षों से नगर पंचायत मे सम्बद्ध ईओ सुरेश कुमार मौर्य जहाँ सूचना आयुक्त से फटकार खाने के बावजूद जनसूचनाए न देने के लिए मशहूर रहे है वही कार्यालय में उपस्थित न रह कर भी पिछली सपा एवं वर्तमान भाजपा सरकार को चुनौती देने का कार्य करते आ रहे है। समस्त सभासदों ने तो उपजिलाधिकारी एवं नगर पंचायत अध्यक्ष सरला साहू को 20 मई 2017 को दिये गये ज्ञापन मे ईओ की कार्यशैली पर प्रकाश डालते हुए कहा भी की सुरेश कुमार मौर्य नगर के विकास कार्यों मे कोई दिलचस्पी नही लेते व लगातार एक भी दिन कार्यालय मे उपस्थित नही होते। सम्पर्क करने पर इनका फोन बन्द रहता है। जिससे नगर की जनता को जन्म प्रमाण पत्र, मृत्य प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर नक़ल, मकान प्रमाण पत्र, जनसूचनाएं आदि के लिए भटकना पड़ता है तथा बार बार सभासदों के घर, चक्कर लगाना पड़ता है। अधिशासी अधिकारी की कार्यशैली से सभी सभासद इस्तीफा देने को विवश है।

इस ज्ञापन पत्र के देने के उपरांत ईओ सुरेश मौर्य ने सप्ताह में एक दिन निश्चित कर जनता को समय देने का आश्वासन भी सभासदों को फोन पर दिया किंतु एक माह बाद भी हालात में ज़रा भी परिवर्तन नही दिखाई दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां साफ सफाई एवं स्वच्छ भारत मिशन को लेकर संकल्पबद्ध है वही विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित स्वच्छता जागरूकता रैली एवं स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर पंचायत सभागार मे कर्मियों को दिलाई गयी शपथ में भी अधिशासी अधिकारी ने आना ज़रूरी नही समझा।

वही सफाई नायक से हुए विवाद में जहां सफाईकर्मी अपने कर्मचारी की हक की लड़ाई लड़ने को धरने पर पूरा दिन बैठे रहे वही कर्मियों की हाल ख़बर लेने के बजाए ईओ जिला मुख्यालय स्थित एक नामचीन होटल पर नाश्ता करते देखे गये जिससे कर्मचारियों में भी अपने अधिकारी के प्रति खिलाफत की भावना उमड़ती देखी गयी।

विकास कार्यों को लेकर यह साहब कितने संजीदा है इसका अहसास इसी से होता है की इस साल नगर पंचायत में दो-दो बार टैक्सी स्टैण्ड एवं कबाड़ की नीलामी ईओ सुरेश कुमार मौर्य के मौजूद न होने पर तारीख आगे बढाई गयी व बार- बार विज्ञापन छपवा सरकारी पैसों की बरबादी करायी गयी वही दो हफ्ते पूर्व लेबर उपलब्ध कराने हेतु किये गये टेंडर के खुलने की प्रक्रिया ईओ के इंतजार मे अटकी पड़ी है।

जहां दो माह से योगी प्रदेश मे कर्मचारियों एवं अधिकारियों को समय पर कार्यालय पहुंचने के निर्देश जारी कर स्वयं विभागों के औचक निरीक्षण की कमान सम्भाले हुए है वही ईओ सुरेश कुमार मौर्य का महीनों से नगर पंचायत न आने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। अधिशासी अधिकारी की इस कार्यप्रणाली से जनमानस, नगर कर्मियों एवं सभासदों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने ईओ के विकास विरोधी रवैये एवं सप्ताह में एक बार भी कार्यालय उपस्थित न होने की शिकायत मुख्यमंत्री के जनता दरबार में करने की बात भी कही है।

रिपोर्ट- अनुज मौर्य

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