अपनी भूलों को स्वीकारना

0
263

अपनी भूलों को स्वीकारना उस झाडू के समान है जो गंदगी को साफ कर उस स्थान को पहले से अधिक स्वच्छ कर देती है।

mahatma gandhi 23

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY