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श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन धरती माँ का हुआ विस्तृत वर्णन
श्रीमद्भागवत हृदय कथा के दूसरे दिन ज्ञानागार परमहंस स्वामी सूर्य प्रबोधाश्रम (स्वामी स्वात्मानन्द) जी ने कहाकि पृथ्वी कर्म प्रधान है। यह 84 लाख योनियों की निवृत्ति का स्थान है। यहां सर्वाधिक आनन्द है क्योंकि पृथ्वी ब्राम्हाण्ड में सर्वश्रेष्ठ है। उन्होंने कहाकि हम धरती को माँ कहते हैं इस विचार से पूरी पृथ्वी का हर प्राणि मात्र हमारा सहोदर है। उन्होंने कहाकि श्रीमद्भागवत की कथा अखण्ड है यह ऐसा अवतरण है जो व्यक्ति एक बार भी भाव मुद्रा में इसके दर्षन को आत्मसात् कर लेता है तो उसका जीवन सार्थक हो जाता है।

स्वामी जी ने कहाकि श्रीमद्भागवत की कथा का आनन्द विनिमय से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। इसके तत्व और आनन्द को प्राप्त करने के लिए भाव समर्पण आवश्यक है तभी आत्मबोध ही होता है। आत्मबोध को ईश्वर भी नष्ट नहीं कर सकते। स्वामी जी महराज ने कहाकि ज्ञान, भक्ति, वैराग्य हृदय के पवित्र संस्कार हैं और काम, क्रोध, लोभ हृदय के दुर्दान्त संस्कार हैं। ज्ञान, भक्ति, वैराग्य का सम्बन्ध सत्य अर्थात् परमात्मा से है। ज्ञान ही है जो परमात्मा का बोध कराता है। उन्होंने कहाकि वैराग्य से सम्प्रक्त हृदय ही सत्संग में बैठता है।

उन्होंने कहा कि ज्ञानी व्यक्ति से परामात्मा भी छिप नहीं सकता अर्थात् ज्ञानी ही भक्ति और वैराग्य के समन्वय से परमात्मा के साक्षात्कार का अधिकारी होता है। उन्होंने कहाकि काम, क्रोध, लोभ का समन करना प्राणि मात्र के लिए आवश्यक है। नारद जी के पृथ्वी लोक आगमन के प्रसंग का वर्णन करते हुए स्वामी जी ने श्रीमद्भागवत हृदय से उद्धरण देते हुए कहाकि ‘‘वेद पंथ विपरीत सब देखेउ मुनि अकुलान। जहां ज्ञान अज्ञान तहं मान अमान सुजान।। ’’अर्थात् कलयुग के प्रभाव के कारण लोगों में वेदों के प्रति अरूचि देखकर नारद जी भी व्यथित हो उठे थे। कलयुग के इस प्रभाव से बचने के लिए श्रीमद्भागवत कथा जो भगवान का वांग्मय स्वरूप है प्राणि मात्र के लिए संबल है। इस अवसर पर कथा यजमान सुनील सिंह, सुरेष सिंह बच्चा बाबू, अम्बुज दीक्षित, मनोज पाण्डेय बजरंगदास, राकेष पाण्डेय, शेर बहादुर सिंह, सुषील शुक्ला, आरके पाण्डेय, जगदम्बा तिवारी आदि लोग मौजूद रहे।

करंट से भैंस की मौत
कोतवाली क्षेत्र के कुडवल गांव की महिला सुमन देवी पत्नी बृजेस कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर विद्युत विभाग के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज किये जाने की बात कही है। मामला सुमन देवी की भैंस के विद्युत करंट से मौत का बचाया जाता है। भैंस की मौत से पीडित का 50 हजार रूपये का नुकसान हुआ है। गांव वालो की माने तो खम्भे के स्टे में आये दिन करंट आये दिन करंट उतर आता था जिसकी सिकायत बिजली विभाग से की गयी थी। लेकिन बिजली विभाग ने लाइन नही ठीक की जिसके चलते खम्भे के स्टे में उतरे करंट की चपरट में आने से भैंस की मौत हो गयी। मामला अटौरा पावर हाउस से लगे हसनापुर फीडर का है। महिला का कहना है कि अगर समय रहते लाइन ठीक कर दी जाती तो भैंस की जान बच सकती थी।

लालगंज के वकील भी गये दो दिवसीय हडताल पर
महराजगंज के वकीलो का मामला लेकर लालगंज तहसील के अधिवक्ताओ ने भी दो दिवसीय हडताल का ऐलान कर दिया है। बैसवारा अधिवक्ता एसोसिषसन की बैठक लालगंज तहसील बार भवन में अध्यक्ष चौधरी राजेन्द्र नाथ सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुयी। जिसमे हडताल का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता असोक शुक्ला ने बताया कि तहसील महराजगंज में सेवारत माल बाबू ने वहां के अधिवक्ता से अभद्र व्यवहार एवं छीना झपटी की थी जिसकी रिपोर्ट पुलिस नही लिख रही है। पुलिस की मनमानी भले रवैये की लालगंज एसोसियेसन कडी निन्दा करती है। महराजगंज में किये जा रहे अनसन का समर्थन बैसवारा के अधिवक्ता भी कर रहे है। वरिष्ठ वकील राजबली सिंह ने बताया कि 17 व 18 मई को हडताल रहेगी। आगे फिर से बैठक कर निर्णय लिया जायेगा। इस मौके पर राजबहादुर मौर्य, षैलेस त्रिवेदी, लक्ष्मी संकर यादव, प्रेमसंकर, सुन्दर बाजपरयी, मत्स्येन्द्र सिंह, इन्द्रराज आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।

सत्संग करने से ही सर्वानन्द की होती है प्राप्ति : स्वात्मानन्द जी महराज
बीएमपीएस कालेज परिसर में असनी कुटी से पधारे प्रसिद्ध संत स्वामी स्वात्मानन्द जी महराज के मुखारबिन्दु से भागवत हृदय पुराण कथा का प्रवचन चल रहा है। कथा के प्रथम दिन समाजसेवी सुरेस नारायण सिंह, स्कूल प्रबंधक सुनील सिंह ने व्यास पीठ की पूजा अर्चना कर भागवत कथा का शुभारम्भ किया। कथा कहते हुये स्वात्मानन्द जी महराज ने ज्ञान वैराग्य, भक्ति पर प्रकास डालते हुये कहा कि काम, क्रोध व लोभ का त्याग कर ही सन्मार्ग प्राप्त किया जा सकता है। कथा सुनने से काम क्रोध व लोभ का विनास होता है। ज्ञान, वैराग्य व भक्ति का मार्ग भागवतकथा सुनने से ही प्राप्त होता है।

स्वामी जी ने कहा कि सत्संग करने से ही सर्वानन्द प्राप्त होता है। उन्होने प्राणी मात्र को नारी सम्मान के प्रति भी सचेत किया और कहा कि जहां नारी का सम्मान है वहीं मां लक्ष्मी का निवास सम्भव है। वर्तमान में समाज में फैल रही कुरीतियो पर चर्चा करते हुये स्वामी जी ने कहा कि जिस उम्र में मनुष्य को सत्संग ग्रहण करना चाहिये उस उम्र में आज विवाह की सालगिरह मनायी जा रही है। ऐसे में प्राणी मात्र का कैसे उद्धार होगा इस पर भी स्वामी जी ने प्रस्न चिन्ह खडा किया। भागवतकथा की चर्चा करते हुये स्वाजी ने कहा कि भागवत रूपी सत्संग से आध्यात्म की प्राप्ति होती है। सत्य को स्वीकार कर लेने की परम्परा ही भागवत है। भागवत ज्ञान व प्रकास का पुंज है।

परम सत्ता को सहज स्वीकार कर लेने वाले ही भागवत प्रेमी हो सकते है। स्वामी जी ने कहा कि अगर सत्य से हमारा संबंध व सानिध्य बन जाये तो सदगति की प्राप्ति निस्चित सम्भव है। जो सत्य से परे रहेगा उसके जीवन में सदैच अशांति रहेगी। जिस आनन्द के लिये संसार की किसी भी वस्तु की जरूरत नही है। वहीं सत्संग है वही स्वात्मानन्द है। भागवत कथा सत्य वस्तु का बोध कराती है। सत्संग के साथ ही स्वामी जी ने राजा परीक्षित व पृथ्वी पर नारद मुनि के विचरण का प्रसंग भी रसपान कराया। इस अवसर पर एलआईसी प्रबंधक राजेस श्रीवास्तव, डा. एमडी सिंह, अरूण कुमार सिंह, हरिसंकर गुप्ता, सिवमनोहर पाण्डेय, सुरेस खन्ना, अम्बुज दीक्षित, वीर पाल सिंह, लघुचन्द्र दुबे, षांतनु सिंह आदि सैकडो भागवत प्रेमी मौजूद रहे।

 

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