700 पाकिस्तानी सैनिकों की पूरी टुकड़ी ने अकेले मेजर सोमनाथ शर्मा के बुलंद हौसले के सामने टेक दिये थे घुटने

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भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक 4 युद्ध लडे जा चुके है और इन सभी युद्धों को पाकिस्तान ने जबरदस्ती ही भारत के ऊपर थोपा था | लेकिन आपको ज्ञात हो की भारतीय सैनिकों के बुलंद हौसलों के सामने एक भी बार पाकिस्तान अपने ही नापाक इरादों में सफल नहीं हुआ है |
बता दें की आज़ादी के तुरंत बाद ही पाकिस्तान ने धोखे से कश्मीर पर कब्ज़ा करना शुरू कर दिया था | लेकिन कश्मीर के विलय के तत्काल बाद ही सरदार पटेल के आदेश पर भारतीय सेना ने कश्मीर घाटी में पाकिस्तानियों को उलटे पैर खदेड़ना शुरू कर दिया था |
इस पूरी कवायद में भारतीय सेना की कुमाऊं रेजीमेंट की चौथी बटालियन की डेल्टा कंपनी की जिम्मेदारी मेजर सोमनाथ शर्मा के मजबूत कन्धों पर थी | मेजर शर्मा इसी डेल्टा कंपनी के कंपनी कमांडर के रूप में तैनात थे और वे मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में अपनी कंपनी के साथ तैनात थे |
700 पाकिस्तानी सैनिकों की पूरी टुकड़ी ने किया था हमला –
बताया जाता है की जिस समय मेजर शर्मा वहां पर अपनी पेट्रोलिंग कम्पनी के साथ तैनात थे उसी समय अचानक से 700 पाकिस्तानी सैनिकों की एक पूरी टुकड़ी ने उनकी कम्पनी को चारों ओर से घेर कर हमला कर दिया था | पाकिस्तानी सैनिक पूरी तरह से हथियारबंद थे और उनके पास मोर्टार और भारी मशीनगनें मौजूद थी |
पाकिस्तानी सैनिकों के मुकाबले बहुत ही कम संख्या में थे भारतीय सैनिक –
मेजर सोमनाथ शर्मा के ऊपर जिन 700 पाकिस्तानी सैनिकों की टुकड़ी ने हमला बोला था उसके मुकाबले भारतीय सैनिकों की संख्या बेहद ही कम थी | और फिर सबसे बड़ी बात यह की मेजर शर्मा की कम्पनी को चारो ओर से घेर लिया जा चुका था लेकिन इतनी विषम परिस्थितियों में भी मेजर शर्मा और उनकी कंपनी पीछे नहीं हटी और उन्होंने दुशमनों का डटकर मुकाबला किया | मेजर शर्मा और उनके साथियों के अदम्य साहस और देश भक्ति के जूनून की ही वजह से वहां भी पाकिस्तानी सैनिकों को मुंह की खानी पड़ी |
अंतिम शब्द- हम अंतिम गोली और अंतिम आदमी तक संघर्ष करेंगे –
इस युद्ध के दौरान मेजर शर्मा खुद सबसे आगे डटे हुए थे और एक-एक कर दुश्मनों को अपना निशाना बना रहे थे | तभी अचानक से मेजर शर्मा के ठीक बगल में एक मोर्टार आकर गिर गया जिसके फटने की वजह से मेजर शर्मा बुरी तरह से घायल हो गए |
लेकिन अपनी शहादत के पहले अपने साथियों से कहे अपने अंतिम शब्दों में मेजर सोमनाथ शर्मा ने कहा था कि दुश्मन हमसे महज 50 मीटर की दूरी पर है और हमें उससे बची हुई अंतिम गोली और अंतिम फौजी तक मुकाबला करना ही होगा | मेजर सोमनाथ की वीरता और युद्ध के दौरान उनके अदम्य साहस के इस कृत्य के लिए उन्हे भारत के राष्ट्रपति द्वारा मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया |

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