मेडल खोकर मासूम को मौत से दिलाई जीत, और दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ी बन गए पिओत्र

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ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेना और वहां पर अपने देश के लिए पदक जीतना दुनिया के हर खिलाड़ी का सपना होता है और सालों की कड़ी मेहनत, लगन और निरंतर प्रयासों के बाद जाकर कहीं ये सपना पूरा होता है, और दुनिया में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिनका ये सपना पूरा हो पता है, ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं पोलैंड के पिओत्र मालाचोवस्की जिन्होने अपनी जीतोड़ मेहनत के बाद रियो ओलंपिक में चक्का फेंक में रजत पदक जीत कर अपना और अपने देश का नाम रोशन किया |

लेकिन रियो से वापस आकर पिओत्र मालाचोवस्की ने इंसानियत के लिए जो किया उसके बाद वो दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ी बन गए हैं, अपने इस काम से उन्होंने पूरी दुनिया का दिल जीत लिया है और जिंदगी के मैदान पर इंसानियत के इस खेल में उनकी इस सबसे बड़ी जीत के लिए सिर्फ उनका देश ही नहीं बल्कि सारी दुनिया उनकी प्रशंसा कर रही है |

दरअसल पिओत्र मालाचोवस्की को ओलेक नाम के एक लड़के की माँ ने पत्र लिखा था, जिसमें उसने बताया कि उनके बेटे को आँख का कैंसर हो गया है, जिसे पढने के बाद इस विश्व विजेता ने अपना पदक नीलाम कर उसका इलाज कराने का फैसला किया |”

मालाचोवस्की ने पहले नीलामी की घोषणा करते हुए लिखा, ‘‘मैं रियो में स्वर्ण पदक के लिए खेला था. आज मैं सब से उससे भी कहीं ज्यादा अनमोल चीज के लिए लड़ने की अपील करता हूं.’’

उन्होंने लिखा, ‘‘अगर आप मेरी मदद करेंगे तो मेरा रजत पदक ओलेक के लिए स्वर्ण से भी ज्यादा कीमती बन सकता है |’’ चक्का फेंक खिलाड़ी ने बाद में पदक का खरीददार मिलने की बात कहते हुए लिखा, ‘‘मैं सफल रहा |’’

अखंड भारत न्यूज़ इस विश्व विजेता खिलाड़ी के इंसानियत के जज्बे को सलाम करता है, और पूरी आशा करता है कि इंसानियत के लिए दिए गए पिओत्र मालाचोवस्की के इस बलिदान से पूरा विश्व ये सीख लेगा कि दुनिया में इंसानियत से बढ़कर ना कोई धर्म है, ना ग्रन्थ है, नाही कोई सम्मान दुनिया में इंसानियत ही सर्वोपारी है |

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