भगवान राम के आदर्शो को अपना कर ही मनुष्य अपने जीवन को महान बना सकता है–हनुमान दास

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चकिया /चंदौली(ब्यूरो)-  इलिया माता पिता गुरु की सेवा ही मानव धर्म है माता पिता के दिए वचन और गुरू के आदर्शो पर चल कर भगवान राम आदर्श पुरुषोत्तम राम कहलाए ।

भगवान राम के आदर्श को अपनाकर मनुष्य अपने जीवन को महान बना सकता है उक्त बातें वृंदावन से पधारे हनुमान दास जी महाराज ने सोमवार को श्री राम कथा की सातवी निशा पर सरैया सैदुपुर में आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा के दौरान कही ।

उन्होंने कहा कि माता के द्वारा राम को 14 वर्ष का वनवास भरत को राजगद्दी दिए जाने का वचन राजा दशरथ से मांगा ।माता की मनसा पिता का वचन पिता के सम्मान के लिए भगवान राम ने बिना कुछ सोचे राजमहल राजगद्दी का त्याग कर 14 वर्ष के बनवास को निकल पड़े ।

भगवान राम के वनगमन का दृश्य देखकर पूरी अयोध्या नगरी रो पड़ी यहां तक कि पशु पक्षी नर नारी भी भगवान के बनवास पर रोते बिलखते रहे ।लेकिन भगवान राम ने सब कुछ की परवाह किए बगैर माता-पिता के आदर्शों को अपना कर अपने पुत्र धर्म का पालन किया था।

आज बढ़ते अराजकता भरे माहौल में हम सभी को भगवान राम के आदर्शों को अपनाने की जरूरत है। तभी समाज में फैल रही बुराइयों से छुटकारा पाया जा सकता है।

इस अवसर पर आयोजक आनंद सागर सिंह ,जय प्रकाश शर्मा, अरुण श्रीवास्तव, राजेश सिंह, विश्वनाथ दुबे ,डॉक्टर गीता शुक्ला, पूनम सिंह, पूनम पांडेय, रवि जायसवाल ,श्री राम जायसवाल ,शंभू नाथ, रिमझिम सिंह ,बुलबुल ,आदि श्रोताओं ने श्री रामकथा का रसपान किया।

रिपोर्ट -ठाकुर माथिलेश

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