साल भर बाद आया विदेश कमाने गये व्यक्ति का शव

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सुल्तानपुर : काफी परेशानी उठाकर साल भर बाद आखिर रोजी रोटी की तलाश में विदेश गये रूपी की लाश शुक्रवार को उसके गांव आ ही गई । कादीपुर कोतवाली क्षेत्र के सरायकल्याण गांव निवासी रुपी हरिजन पुत्र शिवराज सऊदीअरब के रियाद शहर में कमाने गये थे । लगभग सात वर्षों से उनकी नौकरी ठीक चल रही थी । इस बीच रूपी कई बार भारत आकर अपने परिवार से मिलते रहे और फोन पर भी परिवार से सम्पर्क बना रहा । पर अचानक एक दिन 26 अगस्त2015 को रूपी का फोन बंद हो गया और उसकी कोई भी हाल खबर मिलनी बंद हो गई ।

रूपी का परिवार रोज फोन ट्राई करता लेकिन उसकी कोई खोज खबर नहीं मिली । जब महीने भर से ज्यादा समय हो गया तो परिवारीजन किसी अनहोनी की आशंका से व्याकुल हो गये । रूपी के परिवार में पत्नी विधाता (45 वर्ष), पुत्र विनोद (28 वर्ष),गोविन्द (18 वर्ष) पुत्री रेशू (20वर्ष) व विवाहिता पुत्री कुसुम दिन रात पिता को लेकर दर्द झेलते रहे । गरीबी व अभावग्रस्त जीवन जी रहा, नियम कायदे से अनजान रूपी का परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया । रूपी का बड़ा लड़का विनोद दिल्ली तक जाकर सम्बंधित मंत्रालयों और व्यक्तियों से मिला लेकिन उसे कोई सूचना न मिल सकी । एक दिन कादीपुर नगर के चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल हक ने विनोद को रोते हुये देखा तो उसे बुलाकर उससे बात की । परेशान हालत में विनोद को देखकर अब्दुल हक ‘बबलू भाई’ ने उसको सांत्वना दी और हर तरह से मदत का भरोसा दिया । उसके बाद रूपी के परिवार की परेशानी, अब्दुल की परेशानी बन गई।

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अब्दुल ने विधायक ,सांसद के साथ साथ विभिन्न व्यक्तियों और मंत्रलयों में सम्पर्क साधना शुरु कर दिया ।सांसद वरुण गांधी से मिलने पर सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा तो विनोद को साथ लेकर अब्दुल हक प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय गये । वहां जाने पर पी.एम.ओ.की सक्रियता से विदेश मंत्रालय ने सऊदी सरकार से सम्पर्क किया । परिणाम स्वरूप 22 सितम्बर 2016 को सऊदी अरब के भारतीय दूतावास ने अब्दुल हक को फोन किया । फोन पर दूतावास के अधिकारी ने अब्दुल को बताया कि रूपी का शव आठ माह बाद रियाद के अलमगहर रोड पर 10 जुलाई 2016 को रेत में दबा हुआ मिला है । इसके बाद अब्दुल हक ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से व्यक्तिगत मुलाकात की । विदेश मंत्री ने रुचि लेकर इस मामले को देखा । 29 नवम्बर 2016 को अब्दुल हक के ईमेल पर रूपी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त हुई । इसके बाद दोनों सरकारों के बीच कागजी कार्यवाही शुरु हुई । परिणाम स्वरूप शुक्रवार 27 जनवरी 2017 को सऊदी अरब से इंडियन एयरलाइन्स से लखनऊ तक रूपी का शव आया । वहां से अब्दुल हक और परिवार के लोग रूपी का शव घर लेकर आये ।

एक मुस्लिम युवक द्वारा हिन्दू परिवार की की गई इस मदत की चर्चा इलाके में जोर शोर से है ।आज जब एक साल बाद रूपी का शव उसके घर पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया । रूपी का बड़ा पुत्र विनोद सजल नेत्रों से सबसे कहता है – ‘सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल हक के कारण ही मैं अपने पिता का अंतिम संस्कार कर सका ।

रिपोर्ट–संतोष कुमार यादव

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