पडोसी देश की सीमा में घुस कर किया आतंकियों का सफाया … आज भारतीय सेना ने साबित कर दिया कि वह अपने जवानों पर हमला बर्दास्त नहीं करेगी …

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manipur-attack-manipur-army-attack_360x270_41433480575हाल ही में मणिपुर में सेना के गस्ती दस्ते पर हुए हमले का जवाब देते हुए आज भारतीय सेना ने इस पूरे प्रकरण में शामिल लगभग सभी आतंकियों को म्यामार सीमा के अन्दर घुस कर मार गिराया हैं I

जिस दिन सेना के जवानों पर यह हमला हुआ था उसी दिन भारत के गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट  कर कहा था कि हम अपने जवानों की शहादत को इस तरह जाया नहीं होने देंगे  और उन्होंने साथ ही साथ सेना को खुली छूट दे दी थी की वह एक-एक आतंकी को चुन-चुन का मार सकती हैं I

आपको ज्ञात हो कि उक्त हमले में भारतीय सेना के डोगरा रेजीमेंट के 18 जवान शहीद हो गए थे जिससे गुस्साई सेना और भारत सरकार ने तुरंत ही NIA से पूरे मामले की जांच करने के आदेश दे दिए थे, और साथ ही सेना को जबाबी कार्यवाही करने और उक्त प्रकरण में शामिल सभी उग्रवादियों को नस्तेनाबूद करने के भी आदेश दे दिए थे I

उसी मामले में सेना ने आज जबाबी कार्यवाही की हैं यह मुठभेड़ आज सुबह मणिपुर, नागालैंड बॉर्डर पर हुई, इस कार्यवाही में सेना को पडोसी देश म्यामार से भी मदद मिली I म्यामार सरकार और म्यामार की सेना की तरह से भारत सरकार और भारतीय सेना को पूरा समर्थन दिया गया I

सेना की तरफ से जारी बयान में कहा गया हैं कि मणिपुर में घात लगाकर सेना के ऊपर हमला करने वाले आतंकियों में से 15 से अधिक आतंकियों को ढेर कर दिया हैं I सेना ने बताया कि इस कार्रवाई में NSCN के दो कैंप पूरी तरह से ध्वस्त कर दिए गए हैं। 18 जवानों की हत्या के बाद निराश और क्रोधित भारतीय सेना के द्वारा की गयी इस कार्यवाही से सेना और उसके जवानों का मनोबल बहुत ऊँचा उठा हैं I

सूत्रों से प्राप्त खबर के अनुसार सेना ने पहली बार किसी देश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा को लांघकर इस तरह के ऑपरेशन को अंजाम दिया हैं, सेना ने इस ऑपरेशन में MI-17 हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया। सेना के स्पेशल कमांडो आज सुबह MI-17 हेलीकॉप्टर से म्यामार बार्डर को पार कर और इस पूरी घटना को सफलता पूर्वक अंजाम देकर वापस अपने देश की सीमा में आ गए I

सेना ने आज जिस तरह की कार्यवाही को अंजाम दिया हैं ठीक इसीप्रकार की कार्यवाही की बात जब 2008 में मुंबई पर आतंकी हमला हुआ था तब भी की जा रही थी लेकिन तब सेना ऐसा नहीं कर सकी थी I

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