शहीद के घर पहुंचे रक्षामंत्री श्री मनोहर परिर्कर, शहीद की पत्नी ने कहा मै भी पति की ही तरह सेना में भर्ती होना चाहती हूँ

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कानपुर – बीते 13 जून को भारत और चीन सीमा पर तैनात भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल पंकज सिंह चौहान के घर पहुँच कर देश के रक्षामंत्री श्री मनोहर परिर्कर ने उन्हें श्रधांजलि दी है | बता दें कि रक्षामंत्री मनोहर परिर्कर कानपुर में सेना के जवानों के साथ योगशिविर में भाग लेने के लिए कानपुर आये हुए थे | आज सुबह विशेष विमान से कानपुर पहुँचने के बाद रक्षामंत्री ने कानपुर के कैंट एरिया स्थित ग्रेसियन ग्राउंड में पहले तक़रीबन 20 मिनट तक सैनिकों, अधिकारीयों और उनके परिवार जनों के साथ योग किया और उसके बाद वे सीधे हाल ही शहीद हुए लेफ्टिनेंट कर्नल पंकज सिंह चौहान के घर उन्हें श्रधांजलि देने के लिए पहुँच गए |

शहीद की पत्नी की बात सुन स्तब्ध रह गए रक्षामंत्री –
बता दें कि रक्षा मंत्री श्री मनोहर परिर्कर ने शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल पंकज सिंह चौहान के घर पहुँच कर कहा कि मै देश के उस सबसे बहादुर बेटे को श्रधांजलि देने के लिए आया हूँ जिसने देश की सुरक्षा करते हुए अपनी जान सीमा पर न्यौछावर कर दी है |

रक्षामंत्री श्री मनोहर परिर्कर को देखकर शहीद पंकज सिंह की पत्नी फूट-फूट कर रो पड़ी, पुत्र को खोकर पंकज सिंह के माता-पिता भी बेहद गमगीन मुद्रा में रक्षामंत्री के साथ बैठे हुए थे | उधर शहीद की पत्नी रिमझिम की आँखों से आंशुओं की धारा रुकने का नाम नहीं ले रही थी | रक्षामंत्री श्री मनोहर परिर्कर ने खुद शहीद पंकज सिंह की ढाई साल कि बेटी को अपनी गोद में उठा लिया और 8 वर्षीय बेटे विक्रम को अपने पास बिठाकर उनसे बातचीत करने लगे |

रक्षामंत्री श्री मनोहर परिर्कर ने संवेदना जताते हुए शहीद के परिवार को हर तरह के मदद की पेशकश की लेकिन तभी जब रक्षामंत्री परिवार को सांत्वना प्रदान कर रहे थे शहीद की पत्नी धीरे से रुंधे हुए गले से जो कह दिया उसे सुनकर एक छड़ के लिए तो रक्षामंत्री स्वयं स्तब्ध रह गए |

शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल पंकज सिंह चौहान की पत्नी रिमझिम सिंह चौहान ने रक्षामंत्री मनोहर परिर्कर से रुंधे हुए गले से कहा कि वे खुद अपने पति की ही तरह से सेना में शामिल होना चाहती है | साथ ही उन्होंने रक्षामंत्री के सामने दो और भी मांगे रखी उन्होंने कहा कि उनके घर तक जो जीटी रोड जाती है उसका नाम शहीद के नाम पर रखा जाय और शहीद का एक स्मारक बनवाया जाय जिससे आने वाली पीढियां उससे प्रेरणा ले सके और उनके ह्रदय में देश सेवा के प्रति जज्बा बना रहे |

रक्षामंत्री ने शहीद की पत्नी की तीनों ही मांगों को लिखित तौर पर ले लिया है और उन्होंने यह भी कहा है कि वे शहीद की पत्नी का ह्रदय से सम्मान करते है | रक्षामंत्री ने यह भी कहा है कि वे पूरी कोशिश करेंगे कि शहीद के परिवार और उनकी पत्नी की सभी ख्वाहिशों को पूरा किया जाय | हालाँकि रक्षामंत्री ने यह भी कहा है कि शहीद की पत्नी की उम्र ३६ वर्ष सेना के लिए ज्यादा है लेकिन फिर कुछ मामलों में उनके पार वीटों पॉवर होता है जिसके तहत उनकी उम्र उनके जज्बे में बाधा नहीं आएगी |
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