त्यागी और खेतान तो बहुत छोटे खिलाड़ी है, भ्रस्टाचार की गंगा तो कहीं और से ही बहती है – रक्षामंत्री मनोहर परिर्कर

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दिल्ली- अगस्टा वेस्टलैंड घोटाले के मामले में आज रक्षामंत्री श्री मनोहर परीर्कर ने लोकसभा में कांग्रेस को जमकर लताड़ा है | पूर्व कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए रक्षामंत्री ने कहा है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अगस्टा वेस्टलैंड कंपनी को हेलीकाप्टर खरीदने का टेंडर देने के लिए जितना संभव था उतनी रियायतें तो छूट दी है | इतना ही नहीं रक्षामंत्री ने यह भी कहा है कि पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी और खेतान तो बहुत छोटे लोग है इन्होने तो बस सिर्फ बहती गंगा में हाथ धो डाले है असली गंगा तो कही और से ही बहती है | रक्षामंत्री ने यह भी कहा है कि हम यह पता लगाकर रहेंगे कि ये गंगा आखिर बहती कहा से है |

रक्षामंत्री के जवाब पर कांग्रेस ने सदन से वाकआउट कर दिया –
रक्षामंत्री मनोहर परिर्कर ने आज संसद के निचले सदन यानि लोकसभा में बोलते हुए कहा है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अगस्टा वेस्टलैंड कंपनी से हेलीकाप्टर खरीदने के लिए न केवल नियमों की ही अनदेखी की है अपितु उसने हेलीकाप्टरों की कीमत में भी 6 गुना की बढ़ोत्तरी की थी | रक्षामंत्री श्री परिर्कर ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 793 करोंड रूपये में डील तय की थी लेकिन बाद में उसी डील के 4877.5 करोंड रूपये की डील कर दी गयी | उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि एक बेंचमार्क कास्ट को इतना क्यों और किस आधार पर बढाया गया ?

हमारी कार्यवाही उनके खिलाफ होगी जिनके नाम इटली की अदालत ने लिए थे –
रक्षामंत्री ने कहा है कि त्यागी और खेतान तो बहुत छोटे नाम है ये वे लोग है जिन्होंने बहती गंगा में हाथ धो डाले है, हमारी जांच का प्रमुख केंद्र बिंदु तो वे लोग है जहां से ये गंगा निकलती है | हमारी कार्यवाही उन लोगों के ऊपर होगी जिन लोगों के नाम इटली की अदालत ने लिए थे |

जो लोग अरवी खाते है उनके गले में खुजली तो होगी ही –
रक्षा मंत्री ने कहा है कि इस सौदे में 50.7 मिलियन यूरों तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कंपनी को दिए थे जो अभी तक वापस नहीं आये है | वो पूरा का पूरा पैसा अटका पड़ा हुआ है | कांग्रेस के ऊपर लगतार हमला बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा है कि मैंने किसी के ऊपर कोई आरोप नहीं लगाया है लेकिन जो लोग अरवी खाते है उनके गले में खुजली तो होगी ही न |

ट्रायल में भी धोखा किया गया –

रक्षा मंत्री ने कहा है कि करार में लिखा गया था कि हेलीकाप्टर का परिक्षण और ट्रायल भारत में ही किया जाएगा लेकिन तब की सरकार ने इस करार को भी नहीं माना और परिक्षण भारत की बजाय ब्रिटेन में कराया गया | जिसके परिणाम स्वरुप जब भारत में हेलीकाप्टर का परिक्षण किया गया तो वह फेल हो गया | साथ ही रक्षामंत्री ने यह भी कहा है कि अनुबंध में लिखा गया था कि जिस हेलीकाप्टर का ट्रायल किया जाएगा उसी हेलीकाप्टर को ख़रीदा जाएगा लेकिन जब ट्रायल हो रहे थे तब भारत द्वारा ख़रीदे गए हेलीकाप्टर विकसित किये जा रहे थे तो ऐसे तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने दुसरे हेलीकाप्टरों में परिक्षण कराने की रियायत दे दी थी |

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