वाराणसी में हिन्दुस्तान अखबार के वरिष्ठ छायाकार मंसूर आलम का निधन, पत्रकार जगत में शोक

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वाराणसी (ब्यूरो)- शहर के वरिष्ठ फोटोग्राफर और हरदिल अजीज मंसूर आलम अब हम सब के बीच नहीं रहे। सोमवार की सुबह उन्होंने एपेक्स हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। बीते करीब साढ़े तीन दशक से बनारस के अखबारों के लिए छायांकन करने वाले मंसूर आलम इनदिनों काफी बीमार चल रहे थे।

मधुमेह से पीड़ित मंसूर आलम का बीएचयू में इलाज चल रहा था। इस दौरान उनकी दोनों किडनी और लीवर फेल हो चुके थे। बीएचयू में आईसीयू में बेड न मिलने पर उन्हें एपेक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां सुबह उनका इंतकाल हो गया।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सर सुन्दर लाल अस्पताल में भर्ती मंसूर आलम की रविवार को हालत एकदम से खराब हो गयी और उन्हें सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में ले जाने की जरूरत पड़ गयी लेकिन सघन चिकित्सा कक्ष उस समय खाली नहीं था और अंतत: सोमवार की सुबह मंसूर आलम ने दुनिया को हमेशा हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।
उनके निधन से काशी के पत्रकारों और छायाकारों में शोक का माहौल है। सूत्र बताते हैं कि मीडिया कर्मियों ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय प्रशासन से भी मदद मांगी मगर मंसूर आलम को कोई भी मदद काशी हिंदू विश्वविद्यालय प्रशासन से नहीं मिली। मीडियाकर्मियों ने उत्तर प्रदेश के राज्यमंत्री नीलकंठ से भी मदद मांगी मगर उनकी भी नहीं चली।
इस दुखद प्रकरण में पत्रकार बिरादरी हिंदुस्तान अखबार के वाराणसी संस्करण के संपादक पर भी लोग उंगलियां उठा रही है, जिन्होंने अपने फोटोग्राफर को न सिर्फ ढेर सारा तनाव देकर बीमार कर देने में बड़ी भूमिका निभाई, बल्कि इलाज के दौरान अपने स्तर से कोई मदद नहीं की।
मंसूर आलम ने ‘आज’ समाचार पत्र के साथ-साथ सहारा में भी अपनी सेवाएं दी थीं। मंसूर आलम अपनी फोटोग्राफी और मधुर व्यवहार दोनों के लिए जाने जाते थे। वे कई फोटोग्राफरों के लिए अभिभावक की भूमिका में भी रहे।
मंसूर आलम के निधन पर वाराणसी प्रेस क्लब के सचिव रंजीत गुप्ता, काशी पत्रकार संघ के पूर्व उपाध्यक्ष राजनाथ तिवारी, पूर्व कोषाध्यक्ष पवन सिंह, सीपी राय, आशुतोष सिंह ने गहरा दुख जताते हुए कहा है कि मंसूर लाजवाब फोटोग्राफर के साथ साथ अच्छे दोस्त भी थे।
मंसूर का काशी के घाटों और काशी की संस्कृति से विशेष लगाव था। रंजीत गुप्ता ने यह भी जानकारी दी है कि 15 मई को एस. अतिबल छाया चित्र प्रतियोगिता में उनके साथ काम कर चुकी रेखा और मैने मंसूर आलम सम्मान पुरस्कार देने का निर्णय किया है।
रिपोर्ट–बृजेन्द्र बी यादव

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