पंकज सिंह के मोबाइल डिटेल से पुलिस ने किए कई खुलासे

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धनबाद(ब्यूरो)- पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार लोगों की हत्या में किंगपिन की भूमिका निभाने वाले सुल्तानपुर लंभुआ के पंकज सिंह को कोर्ट में घेरने की पुलिस ने तगड़ी तैयारी कर रखी है। हत्या में पंकज जिस मोबाइल का इस्तेमाल कर रहा था, पुलिस ने उसकी कुंडली तैयार की है।

पंकज सिंह के मोबाइल की कुंडली से खुलासा हुआ है कि वह नीरज सिंह की हत्या के दिन आसनसोल नहीं गया था। शूटर अमन सिंह और सोनू उर्फ कुर्बान अली पुलिस से झूठ बोल रहे हैं। दोनों ने पुलिस को बताया था कि आसनसोल में पंकज ने शूटरों से पिस्टल और मैगजीन ली थी। लेकिन पुलिस जांच में पंकज सिंह का मोबाइल लोकेशन हत्या के बाद एक घंटे तक धनबाद में मिला।

21 मार्च को नीरज की हत्या शाम 6.55 से 6.58 बजे के बीच हुई थी। हत्या के बाद शाम 7.41 बजे पंकज की अमन से बातचीत हुई थी। उस समय पंकज गांधीरोड सब्जी बगान के पास था। रात 7.58 बजे पंकज की प्रीति नामक महिला से बातचीत हुई और रात 7.59 बजे पंकज ने दीपू सिंह से बात की। दोनों फोन कॉल रांगाटांड़ के मोबाइल टावर से कनेक्ट हुए थे।

जीटी रोड से गया के रास्ते भागा सुल्तानपुर
मोबाइल लोकेशन से पता चला है कि हत्या के दिन पंकज दोपहर में कुसुम विहार गया था। अंदाजा लगाया जा रहा है कि हत्या के समय वह स्टील गेट के आसपास ही था। वह दामोदरपुर, तेलीपाड़ा होते हुए गांधी नगर पहुंचा।

वहां से बैंकमोड़ होते हुए रांगाटांड़ आया और धैया होते हुए जीटी रोड बरवाअड्डा पहुंचा। इसरी बाजार, गिरिडीह के जामताड़ा, टेकारी, स्टेशन रोड गया, रफीगंज होते हुए 22 मार्च की सुबह 5.04 बजे पंकज यूपी के बार्डर में घुस गया। उसी दिन सुबह 7.16 बजे उसका लोकेशन उसके घर लंभुआ के बूधापुर में मिला है।

फिर शूटरों ने किसको दिया पिस्टल व मैगजीन

24 मार्च को पंकज ने ट्रेन पर आर्डर किया था खाना
पंकज के मोबाइल से पता चला है कि 23 मार्च को वह कोलकाता पहुंचा था। 24 मार्च को पंकज सिंह अमृतसर मेल से हावड़ा से बनारस गया था। उसने हत्या में प्रयुक्त मोबाइल नंबर (9936887360) से ट्रेन पर खाना आर्डर किया था।

पुलिस ने रेलवे और आइआरसीटीसी की मदद से खाना आर्डर करने वाले की जानकारी जुटाई तो पता चला कि जिस पीएनआर वाले यात्री को अमृतसर मेल के सेकेंड एसी में खाना परोसा गया था, उसका नाम पंकज था। पंकज ने जौनपुर रामपुर निवासी धीरज गुप्ता की आईडी से आईआरसीटीसी से टिकट बुक किया था। ट्रेन के किराए का भुगतान धीरज के कोटक बैंक के खाते से हुआ था।

रंजय की हत्या से पूर्व 17 दिन धनबाद में था पंकज
पंकज सिंह का धनबाद आना-जाना लगा रहता था। इसका खुलासा पहले ही हो चुका है। रंजय सिंह की हत्या (29 जनवरी) से ठीक पहले दो जनवरी से 19 जनवरी तक पंकज सिंह धनबाद में ही था। इस दौरान ज्यादातर समय उसका लोकेशन सिंह मेंशन और कोलाकुसमा में ही मिली है।

रंजय की हत्या के बाद पहली बार 16 फरवरी को वह सिंह मेंशन पहुंचा। 19 फरवरी तक वह सिंह मेंशन में ही रहा। 21 फरवरी को वह वापस लंभुआ चला गया। एक मार्च को पंकज फिर धनबाद आया एक से छह मार्च वह कुसुम विहार में ही रहा। सात मार्च से होली बाद यानी 16 मार्च तक वह लंभुआ में था। वह फिर 17 मार्च को धनबाद आया। 17 से 21 मार्च के बीच उसका सारा समय सिंह मेंशन और कुसुम विहार में बीता।

शूटर शिबू को लाने पुलिस प्रतापगढ़ रवाना
नीरज सिंह पर गोलियां बरसाने वाले सुल्तानपुर लंभुआ के शिबू सिंह उर्फ सागर को धनबाद लाने के लिए सरायढेला पुलिस प्रतापगढ़ रवाना हो गई। 29 जून को केस के आइओ निरंजन तिवारी ने शिबू सिंह के खिलाफ सीजेएम कोर्ट से प्रोडक्शन वारंट लिया था।

23 जून की रात शिबू को प्रतापगढ़ पुलिस की स्वाट टीम ने कोहंड़ौर थानाक्षेत्र के टेढ़ी पुलिस हरिहरावीर बाबाधाम के पास पकड़ा था। शिबू सुल्तानपुर लंभुआ के मामपुर झलिया का रहने वाला है। आरोप है कि नीरज पर पहली और अंतिम गोली शिबू ने ही चलाई थी।⁠⁠⁠⁠

रिपोर्ट-गणेश कुमार

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