अप्रैल आते ही लुभावने होर्डिंग- बैनरों व पोस्टरों की भरमार

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बछरावाँ रायबरेली ब्यूरो : अप्रैल में शिक्षण सत्र चालू हो गया है।इसी के साथ नर्सरी व कान्वेंट के तमाम विद्यालयों में प्रवेश प्रारम्भ हो गया है। ये नर्सरी व कान्वेंट स्कूल अभिभावकों को फंसाने के लिए चौराहो से लेकर गली-मोहल्लों व गांव-गांव तक लुभावने वादों के साथ-साथ बड़ी-बड़ी होर्डिगे व पम्पलेट लगाने लगे है। जिनमे तमाम विद्यालय ऐसे है जिनकी मान्यता कक्षा 5 तक है। पर एडमिशन 8 से 10 तक कर रहे है।इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे परीक्षा देने दूसरे विद्यालयों में जाया करते है।शिक्षा विभाग यह सब जानते हुए भी चुप्पी साधे हुए है। जिसके कारण विद्यालय को नोट छापने की मशीन समझने वाले शिक्षा माफियाओ के हौसले बुलंद है। यदि आप अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना के साथ बच्चे का दाखिला किसी स्कूल में कराने गये है तो उस स्कूल के बारे में गहराई से जांच-पड़ताल कर ले क्योकि ग्रामीण क्षेत्रों में बिना मान्यताप्राप्त विद्यालयों की बाढ़ सी या गयी है। क्षेत्र में ऐसे विद्यालयों की कमी नही है जिनकी मान्यता कक्षा 5 से 8 तक की है और कक्षाएं हाइस्कूल व इण्टर तक की संचालित की जा रही है। इसके लिए जितना दोसी स्कूल संचालक है उससे अधिक दोषी शिक्षा महकमा है।बदलते दौर में शिक्षा का महत्त्व समझ में आ गया है,आज हर अभिभावक अपनी हैसियत ही नही उससे भी आगे जाकर अपने बच्चों को पढ़ाना-लिखाना चाहता है।

अभिभावकों के इसी जज्बे को समाज के एक तबके ने नॉट छापने का जरिया बन लिया है। इसी सोच के चलते क्षेत्र के अधिकतर विद्यालय शिक्षा मंदिर बनने के बजाय संचालको के लिए नॉट छापने की मशीन बन गए है। यही कारण है कि विद्यालय संचालक विद्यालय की मान्यता व व्यवस्था देखने की बजाय अपना सारा ध्यान बच्चो के एड्मिसन पर देते है। येन केन प्रकारेण उनके विद्यालयो में बच्चों की संख्या बढ़ जाये। इसके लिए चाहे जो भी करना पड़े वो करेंगे।ये तथाकथित स्कूल संचालक बच्चो को पढ़ाते तो अपने यह है परंतु उनका प्रवेश किसी मान्यताप्राप्त स्कूल में करा देते है मतलब बच्चे पढ़ते किसी विद्यालय में है और परीक्षा किसी दूसरे विद्यालय के छात्र के नाम पर देते है तथा टीसी भी यही से प्राप्त करते है । नया शिक्षण सत्र अप्रैल से शुरू हुआ है फरवरी- मार्च से ही विद्यालयों में प्रवेश कराने के लिए ,अभिभावकों को फ़साने के लिए चौराहो से लेकर गली- मोहल्लों व दीवारों पर जहा भी नज़र डालिये ।बड़ी-बड़ी होर्डिंगे , बैनर,पम्पलेट नज़र आते है इसमें ऐसी- ऐसी लुभावनी बाते लिखी रहती है की अभिभावक फस ही जाता है। इन तमाम बातों से शिक्षा विभाग के अधिकारी बखूबी परिचित है परंतु उनकी चुप्पी के कारण ही शिक्षा माफियाओ के हौसले बुलंद है।क्षेत्र के संभारन्त लोगो ने मांग की है कि जो बगैर मान्यताप्राप्त तथा मान्यताप्राप्त विद्यालयों द्वारा शिक्षा के नाम पर धन उगाही की जा रही है उनकी जांच गोपनीय तरीके से कराई जाए। ताकि समाजसेवा का ढ़िढोरा पीटने वाले शिक्षा माफियाओ का चेहरा समाज के सामने उजागर हो सके।

रिपोर्ट – जयसिंह पटेल

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