मिड्ढ़ा गांव में सवर्णों और दलितों के बीच हुई मारपीट कई घरों में तोड़फोड़, आगजनी, गांव में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात

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बलिया,ब्यूरो : फेफना थाना क्षेत्र के मिड्ढा गांव में होली के दिन रंग डालने को लेकर उपजे विवाद ने बुधवार को राजनीतिक रूप धारण कर लिया। स्कूल में प्रवेश पत्र लेने के दौरान दो समुदाय के छात्रों के बीच हुई तू-तू मैं-मैं ने इस विवाद के बारूद में चिंगारी का काम किया। इसको लेकर गांव के सवर्णों और दलितों के बीच जमकर मारपीट हुई। विवाद ने इतना बङा रूप ले लिया कि कई घरों में तोङ-फोङ के साथ ही आगजनी भी हो गई। दोनों ओर से चले लाठी-डण्डे और ईट-पत्थर में दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गये। सूचना पाकर पुलिस अधीक्षक के साथ ही कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गयी। पुलिस ने घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाने के साथ ही तनाव को देखते हुए गांव में पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों की तैनाती कर दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव के ही सवर्णों और दलितों के बीच होली के दिन रंग डालने को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद से दोनों पक्षों में तनाव व्यापत था। बुधवार की सुबह दोनों समुदाय के कुछ छात्र गांव के प्राइवेट स्कूल पर अपनी बोर्ड परीक्षा का प्रवेश पत्र लेने गये थे। स्कूल में ही छात्रों के बीच होली वाली घटना को लेकर कहासुनी होने लगी, जिसके बाद सभी छात्र अपने घर लौट आए और अपने परिजनों को घटना से अवगत कराया। बच्चों के विवाद ने दोनों समुदायों के बीच होली के दिन हुए विवाद की आग में घी का काम किया और दोनों समुदाय के दर्जनों लोग आपस में भिङ गये। दोनों पक्षों से लाठी-डण्डे और ईट-पत्थर चलने के साथ ही कई मकानों में तोङ-फोङ भी की गई। इसीबीच दंगे का रूप ले चुके विवाद में ग्रामीणों ने दलितों की एक झोपङी के साथ ही तीन बाइक और एक कार को आग के हवाले कर दिया। घटना के संदर्भ में एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए दोनों पक्ष विवाद को राजनीतिक दिशा देने का प्रयास करते रहे।

सवर्णों के अनुसार विधानसभा चुनाव में किसी एक खास पार्टी को वोट न देने से गुस्साए दलितों ने उनपर हमला किया, जबकि इस बावत दलितों ने सवर्णों पर गुण्डागर्दी का आरोप लगाते हुए जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने और आगजनी करने का आरोप लगाया है। इस सन्दर्भ में पुलिस अधीक्षक की माने तो यह बवाल होली में रंग डालने को लेकर उपजा है, जिसमें दोनों पक्षों से मारपीट और आगजनी की घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस की जांच के बाद ही घटना के मुख्य कारण सामने आऐंगे।
दलित और सवर्णों के बीच हुए इस खूनी संघर्ष में एक पक्ष से संतोष सिंह (40), अनुज सिंह (20) पुत्र भरत सिंह, राजदीप (15), बिट्टू सिंह(19) पुत्रगण संतोष के साथ ही दूसरे पक्ष से धीरज(18) पुत्र रामप्रवेश, कृपाल(60), पंकज कुमार(16) पुत्र अच्छे लाल, कुमारी रूमन (18) पुत्री लालबचन, गुड्डू (20) पुत्र अरिन्द राम, सुनील राम (18) पुत्र लक्ष्मीराम, विशाल(16) पुत्र पाठक राम, पंचरत्नी देवी(40) पत्नी रामप्रवेश राम, सोनू(19) पुत्र अम्बिका राम, अजय (17) पुत्र पन्ना लाल, राकेश (17) पुत्र अमरनाथ धूसिया, सरोज भारती(17) पुत्र छट्ठू राम, रामसखी देवी (45) पत्नी पाठक राम, अशोक रावत(50) स्व. रघुनाथ, सत्येन्द्र (18) पुत्र सुरेन्द्र राम, गोल्डी (15) पुत्र रामविलास राम, प्रभूनाथ राम (50) पुत्र सुदामा, गंगाजली देवी (55) पत्नी सुकट राम, युवराज उर्फ मंटू भारती (11) पुत्र बब्बन राम, पप्पू उर्फ नितेश ( 26) पुत्र सुदर्शन राम, संदीस (18) पुत्र रविन्द्र नाथ, चंद्रेश्वर राम (45) पुत्र छोटेलाल एवं कपूर (65) गंभीर रूप से घायल हो गये।

सूचना पाकर पुलिस अधीक्षक आरपी सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक रामयज्ञ यादव, क्षेत्राधिकारी सदर केसी सिंह सहित लगभग आधा दर्जन थानों की पुलिस और पैरामिलिट्री के जवान मौके पर पहुंच गये। पुलिस ने दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप सुनने के बाद मामला दर्ज करते हुए घायलों को मेडीकल उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया। दो समुदायों के बीच तनाव को देखते हुए गांव में पैरामिलिट्री के जवानों की तैनाती कर दी गई है। दोनों पक्षों की तहरीर पर अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है। प्रथम पक्ष दलितों के तरफ से धीरज भारती पुत्र प्रवेश भारती की तहरीर पर भादवि की धारा 147, 148, 149, 323, 504, 506, 427, 336, 436 व 3(1) 10 एससी/एसटी एक्ट बनाम चिंटू सिंह (संदीप सिंह) आदि आठ नामजद व 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया है। द्वितीय पक्ष ठाकुरों के तरफ से संतोष कुमार सिंह पुत्र कैशव सिंह के तहरीर पर भादवि की धारा 395, 397 बनाम नथुनी राम पुत्र करीमन राम आदि 22 के खिलाफ नामजद मुकदमा पंजीकृत किया गया है।

रिपोर्ट–संतोष कुमार शर्मा

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