मर्यादाओं का पालन करना गुरूतर कार्य : हृदय नारायण दीक्षित

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बछरावां (रायबरेली ब्यूरो) : राजर्षि पुरूषोत्तम दास टण्डन को अपना आदर्श मानते हैं पण्डित हृदय नारायण दीक्षित। उत्तर प्रदेश विधानसभा के इतिहास में संसदीय लोकतांत्रिक परम्परा के अनेक स्वर्णिम पृष्ठ जोड़ने वाले राजर्शि टण्डन का नाम उन अमर नायकों में लिया जाता है। जिन्होनें 1937 से 1950 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष के आसन को सुशोभित किया था। इसी पद पर उनके 22वें उत्तराधिकारी के रूप में उन्नाव की भगवन्तनगर विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले पण्डित हृदय नारायण दीक्षित का चयन हुआ है।

श्री दीक्षित ने स्थानीय प्रतिनिधि मण्डल से भेंट के दौरान कहा कि उनके जीवन के हर पल को परीक्षा की घड़ी के रूप में ही लिया है। जिसमें उन्होंने हमेशा सर्वोत्तम करने का प्रयत्न किया है। इस दायित्व को भी वह इसी रूप में स्वीकार कर रहे हैं। अपने आदर्श के रूप में राजर्शि पुरूषोत्तम दास टण्डन का नाम बड़े आदर से लेते हुये उन्होनें कहा कि संसदीय और लोकतांत्रिक प्रणाली में मर्यादाओं का पालन करना और कराना एक गुरूतर कार्य होता है। इसकी महत्ता स्वीकार करते हुये वह चाहेगें कि सदन के सदस्य ही नहीं प्रदेश की जनता की नजरों में भी वह सफल सिद्ध हों। श्री दीक्षित की पहचान एक पत्रकार, लेखक और शोधकर्ता के रूप में बनी हुयी है। कालचिन्तन नाम की पत्रिका का वह सम्पादन भी कर चुकें हैं। जबकि प्रदेश और देश से प्रकाशित होने वाले अनेक समाचार पत्रों के वह स्तम्भ लेखक हैं। एक अनुमान के अनुसार अब तक 4000 से अधिक आलेख प्रकाशित कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश में उन्हें संसदीय मामलों का मर्मज्ञ माना जाता है। पत्रकारों और लेखकों के व अच्छे मित्र हैं। अहंकार और दिखावे से दूर रहने वाले श्री दीक्षित जी पूरी तरह सादगी पसन्द व्यक्ति हैं।

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