भारत ने पठानकोट हमले कि साजिश रचने वाले सभी लोगों की पहचान पाकिस्तान को त्वरित कार्यवाही करने के दिए निर्देश

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दिल्ली- खुफिया एजंसियों ने पठानकोट हमले की साजिश रचने वालों की पहचान कर ली है। खुफिया एजंसियों का दावा है कि पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठन जैशे-मोहम्मद का सरगना मौलाना मसूद अजहर और उसका भाई अब्दुल रऊफ असगर उन चार दहशतगर्दों में शामिल हैं जिन्होंने आतंकवादी हमले की साजिश रची। इस बीच कूटनीतिक संबंधों की गेंद पाकिस्तानी पाले में डालते हुए भारत ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर की बातचीत पठानकोट आतंकी हमले को लेकर इस्लामाबाद की ‘त्वरित और निर्णायक’ कार्रवाई पर निर्भर करती है। इस हमले को लेकर भारत ने उसे ‘कार्रवाई करने योग्य खुफिया जानकारी’ प्रदान की है।

खुफिया एजंसियों ने दावा किया है कि इस बात की पुख्ता जानकारी मिली है कि पठान कोट में हमले की ‘साजिश’ लाहौर में रची गई और इन चार साजिशकर्ताओं के बारे में पाकिस्तान को बता दिया गया है। सरकारी सूत्रों ने दावा किया कि इन चार लोगों के बारे में जानकारियों को पाकिस्तान के साथ ‘उचित माध्यम से’ साझा किया गया है और भारत ने पाकिस्तान के साथ भविष्य में किसी बातचीत के लिए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई को एक शर्त के रूप में रखा है।

उन्होंने कहा कि माना जाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष पूर्व जनरल नासिर खान जांजुआ से बात की और आवाज संबंधी डाटा सहित सभी जरूरी सबूतों को साझा किया। सबूतों में आरोप लगाया गया कि हालिया हमले में जैशे-मोहम्मद की संलिप्तता 15 जनवरी को इस्लामाबाद में भारत और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित विदेश सचिव स्तरीय बातचीत पर सवालिया निशान लगा सकती है।

सूत्रों ने कहा कि भारतीय एजंसियों ने आतंकियों के आका के तौर पर अजहर, रऊफ, अशफाक और कासिम की पहचान की है। रऊफ वर्ष 1999 में काठमांडो में एयर इंडिया के विमान के अपहरण का षड्यंत्रकर्ता था जिसे बाद में अफगानिस्तान से कंधार ले जाया गया। आठ दिन का अपहरण संकट बंधक बनाए गए यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को छोड़ने के बदले अजहर सहित तीन खूंखार आतंकवादियों की रिहाई के साथ खत्म हुआ था।

यह पूछने पर कि इन चारों के खिलाफ भारत पाकिस्तान से क्या कार्रवाई चाहता है, सूत्रों ने कहा कि उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए और नई दिल्ली को सौंपा जाना चाहिए ताकि जांच में उनसे पूछताछ की जा सके। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने हाल में कहा था कि संकेत हैं कि आतंकवादियों द्वारा प्रयुक्त कुछ सामग्री पाकिस्तान निर्मित है।

इस बीच इस्लामाबाद में 15 जनवरी को विदेश सचिव एस जयशंकर और उनके पाकिस्तान समकक्ष एजाज अहमद चौधरी के बीच प्रस्तावित बातचीत पर अनिश्चितता के बादल पठानकोट हमले के बाद से मंडरा रहे हैं। इस हमले के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं। ऐसी अटकलें है कि इस बातचीत को स्थगित किया जा सकता है और उससे पहले दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मिल सकते हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप से यहां पत्रकार सम्मेलन के दौरान विदेश सचिव स्तर की वार्ता को लेकर कई सवाल पूछे गए, लेकिन उन्होंने इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया कि प्रस्तावित बातचीत तय कार्यक्रम के अनुसार होगी या फिर इसे स्थगित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘आज सात जनवरी है और 15 जनवरी में अभी आठ दिन का समय है।’

कार्रवाई करने को लेकर पाकिस्तान के लिए कोई समयसीमा तय किए बिना स्वरूप ने कहा, पठानकोट वायुसेना अड्डे पर आतंकी हमले ने एक बार फिर से सीमापार आतंकवाद से पैदा हुई चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कराया है। उन्होंने कहा, जहां तक हमारा सवाल है तो अब गेंद पाकिस्तान के पाले में है। हमारे सामने तात्कालिक मुद्दा आतंकवादी हमले को लेकर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया है और उसे कार्रवाई करने योग्य सबूत मुहैया कराए गए हंै। स्वरूप भारत-पाक विदेश सचिव स्तर की वार्ता की स्थिति के बारे में पूछे सवाल का जवाब दे रहे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ के बीच फोन पर हुई हालिया बातचीत का हवाला देते हुए स्वरूप ने कहा, उस बातचीत के दौरान हमारे प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से बहुत मजबूती के साथ कार्रवाई का आग्रह किया। उन्होंने कहा, आतंकवादी हमले के संदर्भ में कार्रवाई करने योग्य खुफिया जानकारी और पाकिस्तान में साजिशकर्ताओं से इसके तार जुड़े होने का सबूत पाकिस्तानी पक्ष को दिया गया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने त्वरित और निर्णायक कार्रवाई का वादा किया है। अब हमें उस त्वरित और निर्णायक कार्रवाई का इंतजार है।

यह पूछने पर कि पाकिस्तान के कार्रवाई करने को लेकर कोई समयसीमा तय की गई है तो उन्होंने कहा, ‘हम कोई समयसीमा नहीं दे रहे है। इसके साथ ही त्वरित का मतलब त्वरित होता है और हम इस शब्द की आम व्याख्या के साथ जाएंगे।’ उन्होंने इस दलील को खारिज कर दिया कि भारत की मांग से बातचीत प्रभावित होगी।

उन्होंने सरकार की पाकिस्तान नीति में निरंतरता नहीं होने की बातों को खारिज करते हुए कहा कि भारत की पाकिस्तान नीति ‘स्पष्ट और सतत’ है और वे पाकिस्तान सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ मित्रवत संबंध रखना चाहेगा, लेकिन सीमा पार आतंकी हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, हमने पाकिस्तान के साथ मित्रता का हाथ बढ़ाया है लेकिन हम सीमापार से आतंकवादी हमलों को सहन नहीं करेंगे। पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय समग्र वार्ता की शुरुआत करने का फैसला बैंकाक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच की उस रचनात्मक मुलाकात के बाद किया गया जिसमें आतंकवाद, शांति और सुरक्षा व नियंत्रण रेखा पर सौहार्द से संबंधित चिंताओं पर मुख्य रूप से चर्चा की गई। स्वरूप ने कहा कि पिछले महीने मोदी की लाहौर यात्रा से ‘सकारात्मक माहौल’ बना है, लेकिन अब वे आतंकवादी हमले से पैदा हुई स्थिति का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत चाहेगा कि पाकिस्तान पठानकोट हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करे।

यह पूछने पर मोदी इस साल मार्च में वाशिंगटन में परमाणु शिखर बैठक से इतर शरीफ से मुलाकात करेंगे तो स्वरूप ने सीधा जवाब नहीं दिया और सिर्फ यह कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री को इस कार्यक्रम के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आमंत्रित किया है और मोदी के इसमें भाग लेने के बारे में फैसला अभी नहीं हुआ है। ओबामा ने 31 मार्च-एक अप्रैल को होने वाली परमाणु सुरक्षा शिखर बैठक में शामिल होने के लिए मोदी और शरीफ दोनों को आमंत्रित किया है।

इस्लामाबाद से मिली खबर के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने गुरुवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में पठानकोट आतंकी हमले पर विचार-विमर्श किया और अधिकारियों को भारत की ओर से दिए गए सुरागों पर तेज गति से काम करने का निर्देश दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, ‘बैठक के दौरान राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मसलों पर चर्चा की गई।’

बैठक में वित्त मंत्री इशाक डार, गृहमंत्री निसार अली खान, विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) नासिर खान जांजुआ, विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी, खुफिया ब्यूरो के प्रमुख आफताब सुल्तान और अन्य अधिकारी शामिल हुए। एक जानकार सूत्र ने कहा कि बैठक में पठानकोट हमले और भारत द्वारा अब तक साझा की गई जानकारी पर चर्चा हुई।

उन्होंने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, ‘बैठक में भारत के दिए गए सुरागों पर तेज गति से काम करने का फैसला किया गया।’ एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारत द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर्याप्त नहीं है क्योंकि यह केवल टेलीफोन नंबरों तक सीमित है और पाकिस्तान अतिरिक्त जानकारी के लिए कह सकता है।

उन्होंने कहा, हम कार्रवाई के लिए एक मामला बनाने के लिए ठोस जानकारी हासिल करना चाहेंगे वरना अदालतें हस्तक्षेप करती हैं और संदिग्ध छूट जाते हैं। अधिकारी ने कहा कि बैठक में सहमति बनी कि किसी को हमले में संलिप्तता का दोषी पाए जाने के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह बैठक ऐसे समय हुई जब भारत ने कहा कि वह शरीफ द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंगलवार को टेलीफोन पर बातचीत के दौरान किए ‘तुरंत व निर्णायक कार्रवाई’ के वादे को अमल में लाने का इंतजार कर रहा है। भारत ने पाकिस्तान को ‘इस संबंध में सटीक और कार्रवाई योग्य सूचना’ उपलब्ध कराई है।

बीजिंग से मिली एक अन्य खबर के अनुसार, चीन ने कहा कि उसे आशा है कि भारत और पाकिस्तान बातचीत के जरिए अपने मतभेदों से ‘सही ढंग से निपटेंगे’ और संबंध सुधारने की ‘लय बनाए रखेंगे।’ चीन के इस ताजा बयान से कुछ दिन पहले बीजिंग ने कहा था कि हो सकता है कि भारत-पाक संबंधों को बाधित करने के लिए जान-बूझकर पठानकोट हमला किया गया हो।
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, चीनी पक्ष भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सुधारने में सहायक सभी कदमों का स्वागत करता है। उन्होंने कहा, हम दोनों देशों के बीच आतंकवाद रोधी सहयोग का समर्थन भी करते हैं।

बकौल खुफिया एजंसी
* पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठन जैशे-मोहम्मद का सरगना मौलाना मसूद अजहर और उसका भाई अब्दुल रऊफ असगर उन चार दहशतगर्दों में शामिल हैं जिन्होंने आतंकवादी हमले की साजिश रची।

* इस बात की पुख्ता जानकारी मिली है कि पठान कोट में हमले की ‘साजिश’ लाहौर में रची गई और इन चार साजिशकर्ताओं के बारे में पाकिस्तान को बता दिया गया है।

* सरकारी सूत्रों ने दावा किया कि इन चार लोगों के बारे में जानकारियों को पाकिस्तान के साथ ‘उचित माध्यम से’ साझा किया गया है और भारत ने पाकिस्तान के साथ भविष्य में किसी बातचीत के लिए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई को एक शर्त के रूप में रखा।

नवाज शरीफ से बातचीत के दौरान हमारे प्रधानमंत्री ने उनसे बहुत मजबूती के साथ कार्रवाई का आग्रह किया। आतंकवादी हमले के संदर्भ में कार्रवाई करने योग्य खुफिया जानकारी और पाकिस्तान में साजिशकर्ताओं से इसके तार जुड़े होने का सबूत पाकिस्तानी पक्ष को दिया गया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने त्वरित और निर्णायक कार्रवाई का वादा किया है। अब हमें उस त्वरित और निर्णायक कार्रवाई का इंतजार है। हम पाकिस्तान को कोई समयसीमा नहीं दे रहे हैं। इसके साथ ही त्वरित का मतलब त्वरित होता है और हम इस शब्द की आम व्याख्या के साथ जाएंगे।’ उन्होंने इस दलील को खारिज कर दिया कि भारत की मांग से बातचीत प्रभावित होगी। …..विकास स्वरूप, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

 

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