महाशिवरात्रि पर बाल्हेश्वर मंदिर में उमड़ा शिवभक्तों का जनसैलाब

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रायबरेली। शिवरात्रि का पर्व ऐसे तो प्रत्येक मास मनाया जाता है परंतु फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के दिन शंकर और पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था। इसीलिये आज के दिन उसी विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनायी जाती है। बैसवारा क्षेत्र के ऐहार मे शुक्रवार को ऐतिहासिक बाल्हेश्वर मन्दिर में भोर दो बजे से लेकर सायं तक भोले बाबा के दर्शन के लिये पुरूष,महिला भक्तों का तांता लगा रहा। लोगों के ओम नमःशिवाय के जाप से पूरा मन्दिर परिसर शिव भक्ति के स्वरों में गुंजायमान रहा। हजारों साइकिल, टैक्ट्रर ट्राली, मोटरसाइकिल, और चैपहिया वाहनों की कतारों से शिवभक्तों की श्रद्धा का अंदाजा लगाया जा सकता है,जहां लोग महाशिवरात्रि में सारा दिन उपवास कर मन्दिर में भगवान शिव ज्योर्तिलिंग में जलाभिषेक और बेलपत्र और सफेद मदार का पुष्प अर्पित करते देखे गये। वहीं बच्चों व महिलाओं में वहां लगने वाला मेला आकर्षण का केन्द्र रहा। बच्चे उत्साहित और प्रसन्न नजर आये।

पुजारी पं0 झिलमिल महराज ने बताया कि बाबा बाल्हेश्वर मन्दिर के विषय में दृष्टिगोचर है कि लगभग 5 हजार वर्ष पूर्व घने जंगल में शिवलिंग के प्रकट होने का एहसास उस समय हुआ जब एक गाय प्रतिदिन अपने थन के दूध की धार स्वतः शिवलिंग के ऊपर चढ़ाने लगी। चरवाहों आदि के द्वारा स्थल की महिमा जानने के बाद वहां पर चबूतरे का निर्माण कराया गया और पूजन अर्चना प्रारम्भ हो गया। लगभग 300 वर्ष पूर्व तत्कालीन ऐहार के जमींदार राम सहाय तिवारी ने इस महिमामयी शिवलिंग की मूर्ति को ऐहार में स्थापित करना चाहा। इसके लिए उन्होने खुदाई भी करायी लेकिन गहरी खुदाई के बाद भी अखण्ड मूर्ति को निकाला नहीं जा सका। अनायास उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र जमींदार भगवान दीन ने बाल्हेश्वर मन्दिर का निर्माण कराया जिसकी वर्तमान में व्यवस्था उनके व्यस्था देवशंकर तिवारी के माध्यम से बाल्हेश्वर मन्दिर सेवा समिति कर रही है। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मन्दिर के पुजारी झिलमिल जी महराज ने बताया कि इस वर्ष 60 वां श्रंगार समारोह जनकल्याण समिति व श्री बाल्हेश्वर सेवा समिति के तत्वाधान में मनाया जायेगा। भगवान शिव के श्रंगार के लिए कानपुर के प्रसिद्ध श्रंगारियों को बुलाया गया है,जोकि बाबा बाल्हेश्वर का श्रृंगार करेंगे । व्यवस्था में सूर्य नारायण पाण्डेय,अखिलेश पाण्डेय,धूनम शुक्ला,आयुष पाण्डेय,अवनीस पाण्डेय, शुभम गुप्ता,अभिषेक शुक्ला, शिवेन्द्र शुक्ला,माता प्रसाद, शिवम गुप्ता गोलू,अमित मिश्रा,सुशील कुमार पाण्डेय, कीर्ति मनोहर शुक्ला, अनुज अवस्थी, बबुआ अवस्थी आदि लगे देखे गये। वहीं कुछ श्रद्धालु मन्दिर प्रांगण में बने जलाशय में उपस्थित मछलियों को लइया और आटे की गोलियां चुनाते देखे गये।मन्दिर कमेटी के सदस्यों ने बताया कि आज रात में मूर्ति श्रंगार पूजा आयोजित की जायेगी। पूरे वृतान्त का लाजिक सिर्फ यही आकर ठहरता है कि यदि मन में आस्था व श्रद्धाभाव हो तो पत्थर भी भगवान बन जाते है तो इंसान क्यो नहीं? इसी के चलते क्षेत्र का हिंदू धर्मावलम्बी बाबा बाल्हेश्वर के पूजन अर्चन के लिये जरूर पहुंचता है।

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