परमात्मा और जीवात्मा का मिलन की लीला ही रासलीला है

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सुल्तानपुर(ब्यूरो)- जीवात्मा और परमात्मा के मिलन की लीला ही रासलीला है। रासलीला की कथा के क्रम में व्यास ने गोपी का अर्थ जीव बताया। ‘गोभि: इन्द्रियै: कृष्ण रसं पिवतीति गोपी’ श्लोक का भाव बताते हुए व्यास ने कहा जो अपनी प्रत्येक इन्द्रिय से भगवत रस का पान करे, उसे गोपी कहते हैं। गोपालपुर गांव में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के छठे व अंतिम दिन की कथा में सुलतानपुर जनपद के कथावाचक पं.मनीष चन्द्र त्रिपाठी ने कथा प्रेमियों को रासलीला, कंस उद्धार, भगवान श्री कृष्ण और रुक्मिणी विवाह, प्रद्युम्न जन्म, भगवान श्री कृष्ण के सोलह हजार एक सौ सात अन्य विवाहों की कथा के साथ ही सुदामा चरित्र का प्रसंग विस्तार पूर्वक सुनाया।

कथावाचक ने सुदामा चरित्र प्रसंग पर ‘सुदामा’ का भाव बताते हुए कहा ‘सु’ का अर्थ सुंदर से है, एवं दाम का अर्थ धन होता है। जिसके पास सुन्दर धन अर्थात राम-नाम रूपी धन हो वही सुदामा है। भगवन श्री कृष्ण और रुक्मिणी जी के विवाह की झांकी ने श्रोताओं का मन मोह लिया। इस बीच भजन ‘तू टेंढा तेरी टेंढी नजरिया’ और ‘तेरा किसने किया श्रृंगार, लगे दुलहा सा दिलदार सांवरे’ भजन गीत पर श्रद्धालु झूम उठे। पंडित सौरभ शुक्ल ने मुख्य यजमान दयाशंकर पाठक, विद्या पाठक से व्यास पीठ की पूजा करायी। यहां ओ.पी. चौधरी, लालजी तिवारी, विद्यानन्द पाठक, देवेन्द्र पाठक, सत्यम, गोविन्द, हरिओम सहित श्रोता मौजूद रहे।

रिपोर्ट- दीपक मिश्रा 

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