बौद्धिक काउंसिल ग्रुप के सदस्यों ने सौंपा मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन

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जालौन(ब्यूरो)- उरई स्थित जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के आवास पर न्यायालय में चल रहे मुकदमे को हारने के बाद अब इन आवासों को कहीं न बनवाकर पुराने इतिहास को देखते हुए नगर में उक्त दोनों अधिकारियों के आवासों को बनवाया जाए। इस संबंध में नगर के बौद्धिक काउंसिल ग्रुप के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी व सदर विधायक को सोंपते हुए हुए डीएम व एसपी के आवासों को नगर में बनवाए जाने की मांग की।

बौद्धिक काउंसिल ग्रुप के सदस्यों में धीरेश सक्सेना, ललित शुक्ला, संतोष राठौर, योगेशचंद्र राठौर, अनिल मित्तल, पुनीत मित्तल, पप्पू चैहान, रामजी, गोविंद मिश्रा, प्रतापवीर, बब्लू सेंगर महिया, नीरज सक्सेना, गोलू श्रीवास्तव आदि ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम शीतला प्रसाद यादव व सदर विधायक गौरी शंकर वर्मा को सोंपते हुए बताया कि जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के उरई स्थित आवासों को लेकर चल रहे न्यायालय में चल रहे मामले में प्रशासन हार गया है। जिसके कारण जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के नए आवास बनवाए जाऐंगे। जालौन नगर के इतिहास को देखते हुए तथा नगर की जनता के लिए अवसर को देखते हुए दोनों अधिकारियों के आवासों को नगर में स्थापित कराया जाए। ग्रुप के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया है कि इतिहासकार बताते हैं कि जब उरई शहर की आबादी 1 लाख 10 हजार थी तब जालौन नगर की आबादी 87 हजार थी। लेकिन उसी समय प्लेग की बीमारी फैलने के चलते हजारों की संख्या में लोग यहां से पलायन कर गए। तब यहां की आबादी काफी कम रह गई। जिसके चलते आजादी से पहले ब्रिटिश साम्राज्य में जिला जालौन का मुख्यालय उरई स्थानान्तरित करते हुए ताई बाई पेक्ट लाया गया। जिसके अनुसार जब नगर की आबादी पर्याप्त हो जाएगी तब मुख्यालय पुनः नगर में स्थानान्तरित कर दिया जाएगा। अब यह समय है कि उक्त दोनों अधिकारियों के आवासों को नगर में स्थापित कराया जाए।

रिपोर्ट – अनुराग श्रीवास्तव

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