महिलाओं के साथ यौनाचार/यौन उत्पीड़न के लिए जितना पुरूष जिम्मेदार है उतना ही महिलाएं भी इसकी जिम्मेदार है – प्रो. एस. सी. रैना

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चाँदमारी/वाराणसी(ब्यूरो)- महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ के केंद्रीय पुस्तकालय के सेमिनार कक्ष मे रविवार को विधि विधि विभाग की ओर से “कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न : चुनौतियां एवं समाधान “विषयक एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया|

संगोष्ठी मे विभिन्न राज्यों से आये विद्वानों ने अपने-अपने विचार रखे और इस समस्या पर गहरी चिंता जताई एवं इसके निराकरण के लिये राष्ट्रीय स्तर पर समाज को जागरूक करने पर बल दिया गया | संगोष्ठी की शुरुआत महात्मा गाँधी और शिव प्रसाद गुप्त के चित्रों पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्जवलित करने के साथ विश्वविद्यालय के कुलगीत गायन से हुआ | काशी विद्यापीठ के विधि संकाय के अध्यक्ष प्रो. एस बी सिंह ने संगोष्ठी मे आये अतिथियों का स्वागत करते हुए स्वागत भाषण देते हुए संगोष्ठी के विषय को विद्वानों के समक्ष प्रस्तुत किया |

संगोष्ठी मे बतौर विशिष्ट अतिथि जे.एन.यू. की प्रो. अनुराधा बनर्जी ने वर्तमान समय मे कार्यस्थलों पर महिला कर्मचारियों से होने वाले दुर्व्यवहार एवं यौन शोषण पर चर्चा करते हुए दुःख जताया | उन्होने एक सभ्य समाज मे महिलाओं के साथ नियोजन स्थल पर होने वाले यौन दुर्व्यवहारो को पुरुषवादी सोच का नतीजा बताया तो इसे रोकने के लिये बेहतर कानून बनाने की वकालत की |

मुख्य अतिथि के तौर पर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी शिमला के कुलपति प्रो. एस सी रैना ने अपने सम्बोधन मे कहा कि आज के दौर मे जब स्त्री पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र मे आगे बढ़ रही है, उस दौर मे महिलाओ के साथ यौन दुर्व्यवहार की शिकायतें बहुत दुखद एवं चिंताजनक है |

उन्होने कहा की जिस तरह से आज कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचारों की ख़बरे आती हैं उसके लिये जितना पुरुषवादी सोच जिम्मेदार है उतना ही महिलायें भी इन घटनाओं के लिये जिम्मेदार हैं | आज विज्ञापन के युग मे हर तरफ़ छोटी से छोटी ज़रूरत की चीजे विज्ञापन के माध्यम से लोगो तक पहुँच रही हैं और इन विज्ञापनों मे महिला कलाकारों द्वारा जिस तरीके से अश्लीलता का प्रदर्शन किया जाता है उससे भी लोगो की मानसिकता प्रभावित होती है |

उन्होने कहा की महिलाओं के साथ होने वाली इन घटनाओं को रोकने के लिये केवल कानून बना देने भर से लगाम नही लगेगी इसके लिये समाज के लोगो की मानसिकता भी बदलनी ज़रूरी है | गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. आर के मिश्रा ने कहा की वर्तमान समय संक्रमणकाल का समय है जिसमे पुरानी भारतीय समाज की पुरुष वर्चस्ववादी सोच का आधुनिक दौर से संघर्ष चल रहा है | उन्होने कहा की आज महिलाओं के साथ यौनाचार की घटनाएँ इसी पुरुषवादी सोच का परिणाम हैं, उन्होने आगे कहा कि हमारे देश मे बच्चो को पालने मे ही माँ बाप का रवैया लड़की और लडको के लिये अलग अलग होता है जहाँ बचपन से ही लड़कियों को महिला होने और लड़को को पुरुष होने का एहसास कराया जाता है |

उन्होने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये संगोष्ठी एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज मे जागरूकता लाने पर बल दिया | कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पृथ्वीश नाग ने अपने सम्बोधन मे कहा कि कार्यस्थल पर यौनाचार की चुनौतियों से जूझने से पहले कार्यस्थल को परिभाषित करना ज़रूरी है उन्होने विधि के साथ ही समाजशास्त्रियों को भी आगे आने पर बल दिया | उन्होने कहा की जब भी किसी नियोजन मे महिला द्वारा ऐसा आरोप लगाया जाता है तो संस्था प्रमुखों को ऐसी शिकायतों को गम्भीरता से लेने और उनकी जाँच पड़ताल करते हुए पीडित को हर सम्भव मदद देनी चाहिये ताकि महिलाओं को संस्था के प्रति अपना आत्म विश्वास बनाये रखने मे मदद मिल सके |

कार्यक्रम मे विभिन्न विश्वविद्यालयों से आये छात्रों ने सम्बन्धित विषय पर अपने शोधपत्र भी प्रस्तुत किये | संगोष्ठी का संचालन प्रो. पारसनाथ मौर्य और धन्यवाद विभागाध्यक्ष प्रो. चतुर्भुज नाथ तिवारी ने किया | कार्यक्रम के संचालन मे प्रो० रंजन कुमार,डा०केसरीनँदन शर्मा,डा० हंसराज,डा. रामजतन,डा० प्रभा शंकर मिश्रा समेत विधि के छात्रों एवं कर्मचारियों ने विशेष सहयोग प्रदान किया |
रिपोर्ट-नागेन्द्र कुमार यादव
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