मुश्किल में बृजमोहन की श्याम वाटिका, मंत्री बृजमोहन की पत्नी ने फॉरेस्ट लैंड खरीदकर खड़ा किया आलीशान रिसोर्ट

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महासमुंद/छत्तीसगढ़ राज्य ब्यूरो- सूबे के कद्दावर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने पत्नी के नाम पर फारेस्ट लैंड खरीदा और वहां फाइव स्टार रिसोर्ट खड़ा कर दिया। मामला रसूख से जुड़ा है| लिहाजा पूरे प्रकरण की जानकारी पीएमओ तक पहुंची| कई बार सवाल-जवाब हुआ लेकिन कार्रवाई के नाम पर हर किसी ने हाथ खड़े कर दिये। आरोप है कि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने पत्नी के नाम पर फारेस्ट विभाग की 4 हेक्टेयर जमीन की फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करायी। ये वो जमीन है जिसे सरकार ने योजनाओं के नाम पर किसानों से अधिगृहित किया था।

मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के जि अलीशान रिसोर्ट पर आरोप लगा है| श्याम वाटिका नाम का ये रिसोर्ट महासमुंद जिले के सिरपुर में तैयार हुआ है| ये वो जगह है, जिसका ना सिर्फ ऐतिहासिक बल्कि आध्यत्मिक महत्व है| लिहाजा इस रिसोर्ट को प्रर्यटकों की सुविधाओं के लिहाज से फाइव स्टार फैसलिटी के साथ बनाया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक ये मुताबिक मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के जमीन फर्जी रजिस्ट्री का विवाद उनके पिछले कार्यकाल से जुड़ा है, जब वो स्कूल शिक्षा मंत्री थे।

इधर इस मामले में मुख्यमंत्री ने भी जांच रिपोर्ट मांगी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी जानकारी मैंने चीफ सिकरेट्री से मांगी है| ये पूरी जानकारी मेरे पास आयी है| मैंने चीफ सिकरेट्री और एरीगेशन विभाग से जानकारी ली है कि तथ्यात्मक जानकारी तो मुझे मालूम हो कि कौन सिकरेट्री और पीएमओ से क्या गया है, क्या विषय में जांच हुई है, जिसमें सीएस को कहा है कि इस विषय में जानकारी दें|

ऐरीगेशन के लिए दान में दी गयी थी जमीन, वहां बनाया गया भव्य़ रिसोर्ट-
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक सिरपुर में जिस जगह पर 4 हेक्टेयर जमीन को लिया गया| उस जमीन को आदित्य श्रृजन प्राइवेट लिमिटेड और पुरबाषा वाणिज्य प्राइवेट लिमिटेड ने एक ही काम के लिए अधिगृहत किया था| इन दोनों कंपनियों में मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की पत्नी सरिता अग्रवाल और उनके बेटे अभिषेक अग्रवाल डायरेक्टर थे।
जिस जमीन पर बृजमोहन अग्रवाल ने रिसोर्ट बनाया है| दरअसल उस जमीन को साल 1994 में वाटर रिसोर्स डिपार्टमेंट ने सिरपुर के झलकी गांव में पांच किसानों से अधिगृहित किया था। इस जमीन पर छोटे सिंचाई प्रोजेक्ट तैयार होने थे, जिसमें 23 लाख की लागत से बनी परियोजना के बाद केंद्रीय वन एवं प्रर्यावरण मंत्रालय ने साल 2003 में लैंड ट्रांसफर का फाइनल क्लीयरेंस दे दिया लेकिन इसी बीच तीन खसरा नंबर से करीब 4.12 हेक्टेयर जमीन को बृजमोहन अग्रवाल की पत्नी सरिता अग्रवाल ने 5 लाख 30 हजार 600 रुपये में खरीद लिया। 2013 के चुनाव एफिडेविट में इस जीन का जिक्र बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी पत्नी की रजिस्टर्ड जमीन के रूप में भी किया है जबकि ये जमीन फारेस्ट की है और बिना कैबिनेट के एप्रुवल के इस लैंड का इस तरह से नामांतरण किया ही नहीं जा सकता है।

कब-कब और कहां-कहां हुई शिकायत-
इस मामले में पहली शिकायत मार्च 2015 में किसान नेता ललित चंद्राहुं ने की थी| उन्होंने तत्कालीन कलेक्टर उमेश अग्रवाल को पत्र लिखकर इस मामले की शिकायत किया गया था। कलेक्टर को हुई शिकायत में बताया गया था कि किसानों की अधिगृहित जमीन सरकार के राजस्व रिकार्ड में दर्ज नहीं है। साल 2016 में एक और शिकायत किसान नेता ललित ने इसी मामले में की। इस शिकायत के बाद कमिश्नर बृजेश मिश्रा ने फारेस्ट और जलसंसाधन विभाग को जमीन मामले में पूरा रिकार्ड उपलब्ध कराने को कहा। पिछले साल दिसंबर में इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय को भी की गयी। जिसमें गलत तरीके से जमीन की रजिस्ट्री कराने का जिक्र तो किया ही गया| साथ ही ये बताया गया कि बिना कैबिनेट के एप्रुवल के किस तरह से सरकारी जमीन का स्वरूप बदल दिया गया।

PMO तक की गयी इस मामले में शिकायत-
पीएमओ ने इस पत्र पर तत्काल संज्ञान लेते हुए चीफ सिकरेट्री विवेक ढांढ को पत्र भेजा, जिसके बाद 13 जनवरी को चीफ सिकरेट्री ने महासमुंद कलेक्टर को इस पूरे मामले की जांच का निर्देश दिया। 16 मार्च को कलेक्टर ने अपनी जांच रिपोर्ट चीफ सिकरेट्री को बताया कि जमीन फारेस्ट विभाग के नाम पर नहीं बल्कि विष्णु राम के नाम पर है, जिसने सरिता अग्रवाल को जमीन बेची है। इधर 13 अप्रैल 2016 को कमिश्नर बृजेश अग्रवाल ने कलेक्टर महासमुंद को पत्र भेजकर कहा कि इस मामले में फारेस्ट राजस्व और जल संसाधन विभाग को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिये।

जल संसाधन विभाग ने कहा– नहीं कर सकते कार्रवाई-
कलेक्टर को महासमुंद के जल संसाधन विभाग ने ये कहकर पूरा पल्ला झाड़ लिया कि यह बात तब सामने आयी, जब ललित चंद्रांहु से की गयी शिकायतकी जांच में पाया गया कि भूमि खसरा नंबर 117, नया 802/1, 802/2, 802/3 के रूप में दानकर्ता के द्वारा बृजमोहन अग्रवाल की पत्नी सरिता अग्रवाल के नाम से विक्रय कर दिया गया है| अत: इस पर विभाग द्वारा आज दिनांक को किसी भी प्रकार की कार्रवाई किया जाना संभव नहीं है। इस मामले में एक बार फिर कलेक्टर इसी साल जून महीने में एक और पत्र फारेस्ट और वाटर रिसोर्स डिपार्टमेंट को भेजकर ये पूछा गया कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गयी है। इधर इस मामले में ईओडब्ल्यू और एसीबी को भी शिकायत की गयी है।

रिपोर्ट- हरदीप छाबड़ा

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