मिस इण्डि़या के ग्राण्ड़ फिनाले मे पहुच किया जिले का नाम रोशन

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shatakshi singh

सुल्तानपुर (ब्यूरो)- अवध क्षेत्र की माटी में पली बड़ी शताक्षी सिंह ने सौंदर्य स्पर्धा में मिस इण्डिया के ग्राण्ड फिनाले में पहुच कर जिले का नाम रोशन किया है| अपने हुनर व हौसले के दम पर अपनी मंजिल की राह आसान बनाने वाली शताक्षी सिंह को एक्टर नेहा धूपिया एंव पंजाबी एक्टर सूफिया ने 26 फरवरी को दिल्ली में होने वाली मिस इण्डिया ब्यूटी स्पर्धा के लिये चुना है।

बता दें कि गत दिनो उत्तराखण्ड में ब्यूटी स्पर्धा के हुए आडिशन राउण्ड के जज रहे रण विजय सिंह सिंघा व शरद चौधरी एंव 2016 की मिस उत्तराखण्ड ने सैकड़ो प्रतिभागियो में टाप-25 का चयन किया तो उसमे एक नाम जिले की बेटी शताक्षी सिंह का भी था| मौका मिला तो देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से बायोटेक में इजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही शताक्षी सिंह ने भी पीछे मुड़ कर नही देखा और वाक राउण्ड, इन्ट्रोडक्सन राउण्ड एंव आउटफिट राउण्ड की स्पर्धा के सेमीफाइनल की विजेता बन अपनो को मुसकुराने का मौका दिया |

बाला जी के ड्रीम्स प्रोडेक्सन हाउस के डारेयक्टर शरद चौधरी द्वारा प्रायोजित ब्यूटी स्पर्धा के इस फाइनल शो के जज उवर्शी रौतेला एंव करन कुन्द्रा है। शताक्षी की प्रारंभिक शिक्षा जिले के गुरुचरन एंव सेन्ट जेवियर्स स्कूल से हुई आगे की पढ़ाई के लिये वह देहरादून चली गयी भाई शतमन्यु सिंह नवी कक्षा का छात्र है मां अल्का वर्मा पेशे से वकील है। ब्लाक प्रमुख भी रह चुकी है। पिता राम शिरोमणि वर्मा बसपा व कांग्रेस से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके है। सहकारी बैंक के चेयर मैन रहे। इस समय कांग्रेस के प्रदेश संगठन मंत्री है। मिस इण्डिया के फाइनल में पहुचीं शताक्षी सिंह इस बीच गृह जिले आयी तो हमारे संवाददाता संतोष यादव ने उनसे बात-चीत की जिसके प्रस्तुत मुख्य अंश कुछ इस प्रकार है –

प्र01- परिवार का जुड़ाव राजनीति व खेल से रहा इस माहौल में रह कर सुन्दरी बनने का सपना कब देखा ?
जी हां मेरे परिवार व ननिहाल दोनो जगह राजनेता व खिलाड़ी है। मेरे पापा वालीवाल के राष्ट्रीय खिलाडी रहे। विधानसभा का चुनाव भी लड़े काग्रेस के प्रदेश संगठन मंत्री है। मम्मी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रही ब्लाक प्रमुख भी रही। मेरे नाना यशपाल सिंह राठी हाकी के और मामा अनिल सिंह किक्रेट के खिलाड़ी रहे इस माहौल में रहकर भी बचपन से ही मैने एक्टर बनने का सपना देखा था| जब मै छोटी थी तो मेरे नाना प्यार से मुझे मिस इण्डिया कहकर बुलाते थे। यह सपना उन्होने ही दिखाया था। पापा मुझे मरी हाईट देख वालीवाल का खिलाड़ी बनाना चाहते थे। लेकिन जब मैने उनसे एक्टर बनने की अपने मन की बात साझा की तो वे बोले कि यह सिर्फ एक सपना होता है जो किसी-किसी का पूरा होता है।

कैरियर को ध्यान में रखकर पढ़ाई पूरी करो जब मै इंजीनियिंरंग की पढ़ाई करने देहरादून पहुचीं इस बीच बालाजी के ड्रीम प्रोडेक्शन हाउस जिसके डारेयक्टर शरद चौधरी है। यह इवेन्ट फेमिना की ही तरह है। जब आर्गनाइज हुआ तो मुझे लगा ट्राई करने मे क्या हर्ज है। यह मेरे लिये गोल्डन चांस है। अपने को साबित करने के लिये मैने प्रतिभाग किया और आडिसन में सेलेक्ट हो गयी उसके बाद 29 जनवरी 2017 को सेमीफाइनल हुआ जंहा पूरे देश से प्रतिभागी आये थे। वहां भी मेरा चयन हुआ |

प्र02- यहां तक पहुचने के सफर में क्या तैयारियां रही इस दौरान किस तरह की चुनौतिया सामने आयी ?
ढेर सारी चुनौतियां आई मिस इण्डिया के एक्वार्डिग मेरा वजन बहुत था जैसा माडल्स का होता है उससे बहुत ज्यादा था जिम ज्वाइन किया काफी हार्ड वर्क किया और खुद को इसके लिये तैयार किया और कई तरह की तैयारियां स्पर्धा के अनुरुप करनी पड़ी |

प्र03- यहां तक पहुचने की क्या प्लानिंग रही ?

जब मैने आडीशन पास किया तो मेरे फ्रेन्डस परिवार सभी लोग मोटीवेट करते रहे कि तुम्हे करना चाहिए। आडिशन पास करने के बाद मुझमे भी कांफिडेंस आया कि मै कर सकती हुं फिर मैने उस अनुसार प्लानिंग बनायी और तय किया मुझे मिस इण्डिया फाइनल जीतना है।

प्र04- मन में यहां तक पहुचने की उम्मीद थी ?
माडलिंग का शौक मुझे बचपन से ही था इसीलिये नाना जी मिस इण्डिया कहा करते थे। मेरे मन मे शुरु से ही ये बात रही कि एक कामयाब ऐक्टर माडल बन सके इसलिए उम्मीद भी थी खुद पर भरोसा भी था। कि एक दिन मंजिल जरुर हासिल होगी|

प्र05- यहां तक पहुचने का श्रेय किसे देती है ?
यहां तक पहुचने का श्रेय मेरे मम्मी पापा नाना-नानी मामा सभी को जाता है। लेकिन मेरे मामा ने हर कदम पर मेरे साथ रहकर उत्साह वर्धन किया उसी का नतीजा है कि आज हम यहां तक पहुचे है।

प्र05- छोटे से शहर में रहकर बचपन का यह ख्वाब पूरा कर पाना संभव था ?
यह सच है इस छोटे शहर में रहकर मेरा सपना शायद ही पूरा हो पाता यह संभव नही था कि मै मिस इण्डिया या वालीवुड इंड्रीस्टी में जा सकू लेकिन जब मै देहरादून पहुचीं और इस दौरान मुझे मौका मिला तो लगा कि अपने को प्रूफ करु और जिले का नाम रोशन करु।

प्र06- खूबशूरती की इस स्पर्धा में प्राकृतिक सौन्दर्य एंव कृतम सौन्दर्य की कितनी भूमिका रहती है ?
सौन्दर्य के अपने अलग माइने है सब का अपना महत्व है। मन की सुन्दरता सब पर भारी है। वैसे मुझे बचपन से ही मेकअप पसंद नही था वहां भी मेकप ज्यादा ऐलाउड नही था।

प्र07- आगे की क्या योजना है ?
मै बचपन से ही सेवा का भाव मन में रखती थी। इसलिये भविष्य में सुलतानपुर जिले में ही कैसंर एंव एच0आई0बी पेंसेन्ट के लिये अस्पताल खोलना चाहती हुं इस इवेन्ट से जो कुछ मिलेगा उसे अस्पताल में लगाउंगी जहां लोगो को बेहतर सेवा दी जा सके।

प्र08- बेटियो के लिये क्या संदेश देना चाहेगीं ?
मै उनसे यही कहना चाहती हुं कि यदि तुम्हारे अन्दर टैलेन्ट है तो तुम्हे किसी से डरने की जरुरत नही है। क्योकि टैलेन्ट ज्यादा मायने रखता है। लोगो की बातो पर ध्यान न दे जैसे मौका मिले खूद को प्रूफ करे। अभिभावको से भी अपील है कि बेटियो को दबा के न रखे बल्की प्रोत्साहन दें।

रिपोर्ट-सन्तोष कुमार यादव

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