ग्रामीण पंचायतों पर मनरेगा योजना में खुलेआम दुरुपयोग के आरोप

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बीघापुर/उन्नाव (ब्यूरो) विकास खण्ड में मनरेगा योजना में रोजगार के बढ़े लक्ष्य को पाने के लिए दर्जनों ग्राम पंचायतों ने बरसात के बावजूद भी कार्यों में तेज रफ्तार से चालू किये हैं। धान की चल रही रोपाई के बीच मजदूर मनरेगा में ढूंढ़े नहीं मिल रहे हैं, वहीं ग्राम पंचायतों के कार्यों में दर्जनों मजदूर मजदूरी कर रहे हैं। ग्रामीण पंचायतों पर मनरेगा योजना में खुलेआम दुरुपयोग के आरोप लगा रहे हैं।

विकास खण्ड में अप्रैल से 31 अगस्त तक 67 ग्राम पंचायतों में मनरेगा में 63000 मानव दिवसों का स्रजन करने का लक्ष्य हैं और ग्राम पंचायतें 31 जुलाई तक 48000 दिनों का रोजगार दे चुकी हैं जबकि धान रोपाई का कार्य गांवों में तेजी से चल रहा है जहां मजदूर मनरेगा से ज्यादा मजदूरी भी पा रहे हैं और बरसात के मौसम में सड़क निर्माण व नाली नाले सफाई के नाम पर धड़ल्ले से कार्य चला रहे हैं। ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्य में 6,7 से ज्यादा मजदूर काम नहीं कर रहे हैं।और भुगतान दर्जनों मजदूरों का किया जा रहा है। ग्राम पंचायतें ज्यादा मजदूरी भुगतान कराने में जुटी हुई हैं। कई ग्राम पंचायतें लक्ष्य से दो से तीन गुना कार्य करा चुकी हैं।दुन्दपुर द्वितीय में 200 फीसदी, बयगुलालखेड़ा में 215 फीसदी, सारूखेड़ा 206 फीसदी, रुद्रपुर 251 फीसदी लक्ष्य पूरा कर चुके हैं,वहीं रुझेई,अमरपुरआंव, कैलांव, लालगंज द्वितीय, अकबरपुर, बरदहा, खरझारा, राजपुरपिपरहा, धनुहीखेड़ा, ओसियां, परौरी, रावतपुर, धुआंधार, कर्मी, अलीपुर, सगवार, चिलौली, सथनी ग्राम पंचायतें मानव दिवस स्रजन में कई कदम आगे निकल चुकी हैं।ग्रामीणों का मानना है कि मनरेगा योजना में काम न करने वाले मजदूरों के जाॅब कार्डों का प्रयोग करके ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव योजना में खुलेआम धन का दुरुपयोग कर रहे हैं।

रिपोर्ट – मनोज सिंह

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