मोदी सरकार ने पटरी व्यवसाय को डाला संकट में

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चन्दौली(ब्यूरो)- मोदी सरकार के तीन साल कारपोरेट घरानों के हितों को पूरा करने के लिए देश के छोटे मझोले कुटीर उद्योग, खुदरा व्यापार को बर्बाद करने के गवाह बनी है। पहले खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) फिर नोटबंदी और अब जीएसटी को लागू कर मोदी सरकार ने पटरी व्यवसायियों के जीवन को संकट में डाल दिया है। देश में लगभग पांच करोड़ लोग पटरी, ठेला, रेहड़ी के जरिए व्यवसाय कर अपनी जीविका चलाते है।

सत्ता में आने के पहले भाजपा के लोग खुदरा व्यापार में एफडीआई का विरोध करते थे और सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने खुदरा व्यापार में सौ प्रतिशत एफडीआई को लागू किया। नोटबंदी के कारण छोटा मझोला कुटीर उद्योग बर्बाद हो गया इसमें लगे लोगों के सामने आज आजीविका का संकट पैदा हो गया है और इसी बहाने शुरू की गयी कैशलैस इकनौमी पटरी व्यवसाय को तबाह कर देगी। जीएसटी से बने नए टैक्स नियम भी छोट व्यवसायियों के लिए खतरनाक है। उक्त बाते स्वराज अभियान के नेता व ग्रामीण मजदूर मंच के प्रवक्ता अजय राय ने कहीं।

उन्होंने कहा कि देश के पटरी दुकानदारों की आजीविका व सामाजिक सुरक्षा के संरक्षण के लिए 2014 में केन्द्रीय कानून बना परन्तु मोदी सरकार द्वारा सत्ता में आने के बाद इसे ठण्ड़े बस्तें में डाल दिया। अब सुप्रीम कोर्ट के कड़े रूख के बाद प्रदेशों में इसका अनुपालन कराया जा रहा है। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बनी नियमावली व योजना योगी सरकार ने लागू तो की परन्तु इसमें पटरी, ठेला, सगड़ी व्यावसायियों के सामाजिक सुरक्षा के लिए बीमा, निशुल्क चिकित्सा लाभ जैसे प्रावधान नहीं किए गए है।

जबकि भाजपा ने चुनाव पूर्व जारी अपने लोक संकल्प पत्र में यह वायदा किया था कि सरकार बनने के बाद पटरी, रेहड़ी, ठेला दुकानदारों समेत शहरी गरीबों का 2 लाख रू0 का निशुल्क बीमा कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि पटरी दुकानदारों की आजीविका व सामाजिक सुरक्षा के संरक्षण के लिए बने केन्द्रीय कानून को लागू कराने, पटरी दुकानदार का 2 लाख का निशुल्क बीमा कराने व चकिया में सर्वे न हो जाए तब तक बेदखली पर रोक लगाने जैसे मुद्दों पर बड़ा आंदोलन खड़ा होगा।

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