नक़ल विहीन परीक्षा कराने के लिए बाध्य है जिला प्रशासन, 1 दर्जन से ज्यादा विद्यालयों को किया ब्लैक लिस्टेड

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मैनपुरी (ब्यूरो)- उत्तर प्रदेश में सत्ता और निजाम बदलते ही अफसरों के भी रुख बदल गए। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के कड़े रुख से नकल माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। 16 मार्च से हुई बोर्ड की परीक्षाओं में अब तक डीएम की ओर से नकल कराने वाले 15 कक्ष निरीक्षकों और केंद्र व्यवस्थापकों के विरुद्ध मामला दर्ज कराया जा चुका है| वंही 13 विद्यालय जो सामूहिक नकल कराने में संलिप्त पाए गए थे इनपर भी विद्यालयों को ब्लैक लिस्टेड की श्रेणी में शामिल कर दिया गया है।

सख्ती के चलते छोड़ी परीक्षा-
जिला प्रशासन की मुस्तैदी के चलते बड़ी तादाद में परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी है। वही दूसरी ओर नकल माफियाओं ने भी नकल कराने के वादो को ताक पर रख कानूनी पचड़ों से दूर रहने का मन बना लिया है।

आपको बताते चले कि एसडीएम किशनी से तीन छात्र मिले और आरोप लगाते हुए बताया कि ज्वाला प्रसाद इण्टर कालेज में हमलोगो से 8000 रुपये नकल कराने के एवज में मांगे गए थे। इनकी शिकायत को गम्भीरता से लेते हुये जव एसडीएम किशनी अभिनाश चन्द्र दूसरी पाली के पेपर में बाइक से पहुँचे ताकि किसी को शक न हो सके और उन्होंने कॉपिया चेक करनी शुरू करदी। जादातर कॉपियों में इक जैसे ही उत्तर मिले। साथ ही कई में नोट भी रखे मिले।

ऐसा ही वाक्या घिरोर के एक कालेज में भी देखने को मिला जहाँ शिकायत मिलने पर मोटर सायकल द्वारा ही एसडीएम घिरोर परीक्षा केंद्र पर पहुंचे जहाँ सामूहिक तौर पर नकल का खेल चल रहा था, जिसकी वीडियो ग्राफी भी अधिकारी द्वारा करायी गयी है।
अब तक लगभग 1 दर्जन से भी अधिक विधायलयों को काली सूची में डाला जा चुका है।

रिपोर्ट- प्रमोद झा

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