मां शीतला को चढ़ाई गई पूड़ी अठौरी और हल्वा, बसौढ़ा आठे के साथ आरम्भ हुआ देवी मेला

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मैनपुरी(ब्यूरो)-
जगत आराध्या मां शीतला के दरवार मंें होली विदाई के रूप में मनाया जाने वाली बसौढ़ा आठे की पूजा श्रृद्धा और सदभाव के साथ धूप दीप नेवैध्य के अलावा पूड़ी अठौरी आहुति के साथ मनाई गयी। भक्तों ने बदलते मौसम में आने वाली वीमारियों से परिवार को बचाये रखने की प्रार्थना की इसके साथ ही शीतला दरवार में हर वर्ष लगने वाले देवी मेला का शुभारम्भ हो गया। हांलाकि यहा लगने वाली प्रदर्शनी 1 अप्रैल से आरम्भ होने की तैयारियां की जा रही है।

ग्रन्थों के अनुसार राक्षसों और उपद्रवियों द्वारा धर्म के साथ खिलवाड़ करते हुये अधर्म के रूप में समाज को विभिन्न प्रकार की बीमारियां परोसी जा रही थी। दैत्यों के विस्फोट से लोगों में जलन, चेचक, हैजा, खशरा, और छाले जैसी बीमारियों से जनजीवन बुरी तरह जल रहा था।

देवताओं ने जब दैत्यों के प्रकोप को शांत करने के लिए त्रिदेव से याचना की तो उन्होने शीतलता की देवी के रूप में शीतला का आवाहन करते हुये उन्हें इस संकष्ट से मुक्ति दिलाने को कहा। माता शीतला ने जानवरों में सवसे सीधे और मेहनती कहे जाने वाले गधे को अपना वाहन मानते हुए एक हाथ में नीम की झाड़ू और कलश लेकर समाज में जब जल का छिड़काव किया। जिससे बीमारियों का प्रकोप शांत हो गया और इसी आस्था को मानते हुये समाज में बसौढ़ा आठे के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। शीतला धाम स्थिति शीतला मंदिर में रविवार की शाम से ही बसौढ़ा पूजा करने की तैयारियां आरम्भ हो गई थी। अष्टमी लगते ही सैकड़ों की संख्या में भक्तगण पूड़ी, अठौरी, बीरा बतासे आदि लेकर देवी मंदिर जा पहुचे । जहां धूप कपूर के साथ अज्ञारी देकर मां शीतला से परिवार को बीमारियों से बचाने और कृपा बनाये रखने का आर्शीवाद लिया।

शीतला माता दरवार में लगने वाली प्रदर्शनी इस वार चुनाव और परीक्षा होने के कारण एक 1 अप्रैल से आरम्भ होगी। इसके लिये प्रशासन ने तैयारियां आरम्भ कर दी है।

रिपोर्ट- दीपक शर्मा
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