विक्षिप्त, दिव्यांग दलित युवती बनी बिन ब्याही माँ

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खीरों(रायबरेली ब्युरो)– थाना क्षेत्र के गाँव की एक मानसिक रूप से विक्षिप्त और नेत्रहीन, बाए हांथ से विकलांग दलित युवती को अज्ञात दरिंदों ने अपनी हवस का शिकार बना डाला। दरिंदगी और हवस का शिकार बनी पीड़िता ने मंगलवार की सुबह लगभग चार बजे एक बेटी को जन्म दिया। शौच के लिए गई ग्रामीण महिलाओं ने उसे संभाला और ग्रामीणों को सूचना दी । ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची खीरों पुलिस ने मामले की जांच की और ग्रामीणों ने एम्बुलेंस की मदद से पीड़िता को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खीरों पहुंचाया।

खीरों क्षेत्र के गड़रहन खेड़ा मजरे ऐन्धी की एक 25 वर्षीय दलित युवती दोनों आँखों से अन्धी मानसिक रूप से विक्षिप्त और बाएँ हांथ से विकलांग है। लगभग दो वर्ष पूर्व उसकी माँ का निधन हो गया था तथा बड़ी बहन की शादी कई वर्ष पूर्व उन्नाव जनपद के बीघापुर थाना क्षेत्र के गाँव गड़रियन खेड़ा मजरे पाटन में हुई थी। ग्रामीणों के अनुसार पीड़िता का पिता भी सारा दिन शराब के नशे में धुत इधर उधर घूमता रहता है। पीड़िता कई वर्षों से इधर-उधर भटक रही है। सोमवार की रात लगभग 8 बजे वह भटकती हुयी गड़रहन खेड़ा गाँव पहुँची। ग्रामीणों ने उसे सहारा दिया और खाना खिलाया। मंगलवार की सुबह लगभग 4 बजे उसने गाँव में सड़क पर एक बेटी को जन्म दिया। सुबह शौच के लिए निकली महिलाओं ने उसे सहारा दिया। इसी गाँव की एक दलित विधवा महिला अमाला ने उसकी नवजात बेटी और पीड़िता की मदद की। ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुँची खीरों पुलिस ने मामले की जांच की। ग्रामीणों की मदद से अमाला ने पीड़िता और नवजात बेटी को सीएचसी खीरों पहुंचाया।

पीड़िता पहले भी बन चुकी है बिन व्याही मां-
पीड़िता के अनुसार वह इससे पहले भी कई बार दरिंदों की हवस का शिकार हो चुकी है। उसने एक वर्ष पूर्व भी सीएचसी खीरों में एक बेटे को जन्म दिया था लेकिन किसी निःसंतान दंपति ने उस नवजात बेटे को गोद ले लिया था और उसकी परवरिश हो रही है। लेकिन दरिंदों ने फिर से उसे बिन व्याही माँ बना डाला ।

अमाला की गोद में पलेगी मासूम –
बिन बाप की बेटी और असहाय माँ को सहारा देने पहुँची गड़रहन खेड़ा निवासिनी विधवा अमाला के अन्दर माँ का वात्सल्य उमड़ पड़ा। उसने ग्रामीणों के सामने इस नवजात बेटी को गोद लेने का प्रस्ताव रखा।

अमाला ने बताया कि मेरे दो बेटे नीरज (18 वर्ष ) और छोटू (16 वर्ष ) है। जिनकी कोई बहन नहीं है। बड़ा बेटा मुम्बई में प्राइवेट नौकरी करता है। इस घटना की सूचना जब अमाला ने अपने बेटे नीरज और छोटू को दी तो दोनों ने यह कहते हुये उसे गोद लेने को कहा कि उनकी सूनी कलाई में राखी बांधने वाली एक बहन मिल गई है। अमाला ने नवजात बेटी को गोद लेने के साथ ही पीड़िता को भी सहारा देने का फैसला लिया है। ग्रामीण मुक्त कंठ से अमाला की प्रशंसा कर रहे हैं। नवागत थानाध्यक्ष खीरों रवीन्द्र कुमार मिश्रा ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही बच्ची को इच्छुक महिला को सौंपा जाएगा। जिससे बच्ची को भविष्य में कोई परेशानी न हो।

रिपोर्ट- राजेश यादव
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