डाॅ. लोहिया के जन्मदिवस पर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चलने की प्रेरणा ली गई

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मैनपुरी : आज दिनांक- 23.03.2017 को आवास विकास स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय पर डाॅ0 राम मनोहर लोहिया जी का जन्म दिवस मनाया गया। डाॅ0 राम मनोहर लोहिया जी पेशे से अध्यापक व हद्रय से सच्चे देश राष्ट्रभक्त थे। डाॅ0 लोहिया जी नौजवानों की, कमजोरों की, असहायों की उस समय की तत्कालीन सरकार के खिलाफ और पूँजीवादी व्यवस्था के खिलाफ उस दौर में सबसे पहले विरोधी आवाज उठाने वाले समाजवादी चिन्तक महानायक डाॅ0 राममनोहर लोहिया जी थे, जिन्होंने उस दौर में तत्कालीन सरकार को चेतावनी देते हुये, नौजवानों की हक की बात कहते हुये, एक नारा दिया था, बेरोजगारों को काम दो या बेरोजगारी का दाम दो’’ और नौजवानों में जोश भरते हुये, उस समय की सरकार को समय-समय पर आग्रह करते हुये उन्होंने कहा था ’’ जिधर जवानी चलती उधर जमाना चलता है कौन कहता है कि आसमान में छेद नही होता अरे पत्थर उछाल कर के देखो, जैसे उत्साह भरने का काम नौजवानों में समाजवादी चिन्तक डाॅ0 राममनोहर लोहिया ने किया था और अपने पूरे जीवन पर्यन्त कमजोर असहाय नौजवानों पिछड़ांे की लड़ाई लड़ने का काम किया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष खुमान सिंह वर्मा ने की।

जिलाध्यक्ष खुमान सिंह वर्मा ने कहा कि डाॅ0 राम मनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को फैजाबाद जनपद के कस्बा अकबरपुर में हुआ था। डाॅ0 लोहिया जी को भारत के एक अजेय योद्धा और महान विचारक के रूप मे देखा जाता है। देश की राजनीति में स्वतन्त्रता आंदोलन के दौरान और स्वतन्त्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए, जिन्होंने अपने दम पर शासन का रूख बदल दिया जिनमें एक डाॅ0 राम मनोहर लोहिया भी थे। विधायक किशनी इंजी0 बृजेश कठेरिया ने कहा कि डाॅ0 लोहिया ने अपनी प्रखर देश भक्ति और बैलोस तेजस्वी समाजवादी विचारों के मध्य भी अपार सम्मान हासिल किया। राज्यमंत्री डाॅ0 दीप सिंह पाल ने कहा कि डाॅ0 राम मनोहर लोहिया सहज परन्तु निडर, अवधूत राजनीतिज्ञ थे, उनमें सन्त की सन्तता, निर्लिप्तता और अपूर्व त्याग की भावना थी। पूर्व विधायक भोगांव आलोक कुमार शाक्य ने कहा कि डाॅ0 लोहिया मानव की स्थापना के पक्षधर समाजवादी थे, वे समाजवादी भी इस अर्थ में थे कि समाज ही उनका कार्यक्षेत्र था और वे अपने कार्यक्षेत्र को जनमंगल की अनुभूतियों से महकाना चाहते थे। प्रो0 के0सी0 यादव ने कहा कि डाॅ0 राम मनोहर लोहिया चाहते थे कि व्यक्ति-व्यक्ति के बीच कोई भेद, कोई दुराव और कोई दीवार न रहे। सब जन समान हों। सब जन सबका मंगल चाहते थे। देवेन्द्र सिंह यादव (एड0) ने कहा कि इन्होंने स्नातक, पी0एच0डी0 तक की शिक्षा प्राप्त की थी। इन्होंने अग्रेंजो भारत छोड़ो आन्दोलन में बढ-चढ़ कर भाग लिया था और 20 मई 1944 गोवा मुक्ति आंदोलन में ये जेल भी गये थे।

इस मौके पर दीन मोहम्मद दीन, चन्द्रशेखर यादव, रामवरन सिंह यादव, धनवेश यादव, विदेश यादव, प्रमोद यादव, मन्नी लाल चैबे, नृप चैधरी, रावल सिंह यादव, राजेश खटिक, देवेन्द्र यादव, नगरिया, ऋषि यादव, मेवाराम शाक्य, राजू चैधरी, अरविन्द्र यादव, किशन दुबे, गोपालदास लोधी आदि ने विचार व्यक्त किये।

इस अवसर पर विपिन कठेरिया, जहरी बाबा, गुरूदेव सिंह यादव, संजय यादव, मानवेन्द्र सिंह, मनोज यादव, अलकेश यादव, राजीव कुशवाह, रमेश यादव, जीतपाल सिंह, रिंकू यादव, प्रवेश राजपूत, रवीश यादव, कौशलेन्द्र मिश्रा, मनोज शाक्य, नीरज यादव, जितेन्द्र द्विवेदी, संदीप यादव, प्रदीप राजपूत, दुर्वेश यादव आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

रिपोर्ट – दीपक शर्मा

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