सोमवार को पूरा विश्व मनायेगा गौरैया दिवस

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मैनपुरी(ब्यूरो)- सोमवार को पूरा विश्व घरेलू चिड़िया गौरेया के सम्मान में विश्व गौरेया दिवस मनाने जा रहा है। सरकार की लाख पहल के बावजूद पिछले वर्ष भी विश्व गौरेया दिवस पर लाखों रूपये खर्च करके इसके प्रजनन, पालन और संरक्षण के लिए समाजसेवियों और सरकारी संस्थानों द्वारा सरकार के पैसे से खुलकर मनोरंजन किया गया था। हजारों घोंसले, चिड़िया के प्रजनन और पालन के लिए वितरित किये गये। वह घोंसले कहाँ हैं और कितनी गौरेया परिवार में बढ़ोत्तरी हुई इसके आंकड़े साल पूरा होने के बाद भी किसी के पास नहीं हैं। सरकार ने किसको कितने घोंसले दिये और उसमें कितनी चिड़िया चिरौटे की बढ़ोत्तरी हुई इसके जबाव में केवल बगल झांकने के अलावा कुछ भी सामने नहीं आ रहा है।

परिवार में भोजन करते समय हमारे भोजन का हिस्सा बनने बाली घरेलू चिड़िया गौरेया और चिरोटा समाज में बन रहे आलीशान बंगलों और उसमें उनके रहने की जगह न होने के कारण गौरेया विलुप्ति के कगार पर जब पहुँच गयी तो सरकार की आँख खुली कि अब आंगन में चिड़ियों की चहचहाहट नहीं सुनाई देती। कारण भी सामने आया कच्चे मकानों और छप्परों में रहने वाली घरेलू चिड़िया चिरौटा धीरे-धीरे जगह न मिलने के कारण विलुप्त हो रहे हैं तो सरकार ने इनकी संख्या बढ़ाने के लिए विश्व गौरेया दिवस मनाने के नाम पर लम्बा खेल करना शुरू कर दिया। वन विभाग द्वारा लम्बे-चैड़े नारों के साथ भारी-भरकम बजट जुटाया गया और हजारों घोंसलें बनवाकर कथित रूप से चिड़ियों से प्रेम करने वाले परिवारों में वांट दिये गये। इस वर्ष 20 मार्च सोमवार को फिर से विश्व गौरेया दिवस मनाया जा रहा है। इस सम्बन्ध में जब एक जिम्मेदार अधिकारी से पूछा गया कि पिछले वर्ष बांटे गये हजारों घोसलों में आखिर कितनी गौरेया परिवार में बढ़ोत्तरी हुई इसका उत्तर देने वाले अधिकारी इस पर बगले झांकने लगे, बोले जिन लोगों को घोंसले दिये गये थे उनका कोई सही रिकार्ड हमारे यहाँ नहीं है। फिर हम कैसे बता सकते हैं कि कितनी गौरेया इस जनपद में बढ़ी होंगी। यह सच है कि अब हर परिवार में सदस्य की तरह रहने वाली चिरैया, चिरोटा पूरी तरह से लापता है।

रिपोर्ट- दीपक शर्मा
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