मुंबई हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, महिलाओं को हाज़ी अली के अंदरूनी हिस्सों में प्रवेश की अनुमति…

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मुंबई हाईकोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुंबई स्थित हाज़ी अली दरगाह के अंदरूनी हिस्सों में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देदी है, हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब मुस्लिम तथा अन्य समुदायों की महिलाएं भी हाज़ी अली की मज़ार के दर्शन कर पाएंगी, सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ती देसाई की भूमाता ब्रिगेड ने इसे महिलाओं के अधिकारों की जीत बताते हुए गुलाल उड़ाकर कोर्ट के फैसले का स्वागत किया |

कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए याचिका करता ने नूरजहां साफिया ने कहा “हाईकोर्ट ने हमें हमारे अधिकार वापस दिए हैं, हालाँकि कोर्ट ने ट्रस्ट को 6 हफ्ते की मोहलत दी है ताकि वो सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें, लेकिन 6 हफ़्तों के बाद हम ज़रूर जायेंगे और अगर मामला सुप्रीम कोर्ट जाता है तो हम वहां भी अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं |”

हाईकोर्ट के फैसला सुनाने की बाद हाज़ी अली ट्रस्ट के लोगों ने कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए 8 हफ़्तों की मोहलत मांगी थी पर कोर्ट ने मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए ट्रस्ट को 6 हफ़्तों की मोहलत दी है |

एमआईएम के नेता हाजी रफत हुसैन ने कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जाहिर की उन्होंने कहा दशकों को चला आ रहा बाबरी मस्जिद का मामला आज तक अटका पड़ा है और उसपर कोई फैसला नहीं आया है, इस मामले में कोर्ट ने जल्दबाजी दिखाई है और यह सब केंद्र की बीजेपी सरकार के कारण हो रहा है, इस्लाम महिलाओं को मजार के पास जाने की इजाजत नहीं देता यह धर्म के खिलाफ है |

गौरतलब है कि 2011 तक हाज़ीअली में महिलाओं के प्रवेश पर कोई पाबन्दी नहीं थी थी पर 2012 में मजार के अंदरूनी हिस्सों में महिलाओं के प्रवेश पर पाबन्दी लगा दी गयी थी जिसके बाद 2014 में नूरजहां साफिया ने कोर्ट में याचिका दायर कर महिलाओं के मजार में प्रवेश की अनुमति मांगी थी |

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