पुलिस के निलंबित जवान ने ठुकराया सुप्रीमकोर्ट का ऑफर, बिना दाढ़ी रखने से किया इंकार

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नई दिल्ली- दाढ़ी रखने पर अड़े महाराष्ट्र स्टेटरिजर्व पुलिस फ़ोर्स (SRPF)  जहीरुद्दीन शमसुद्दीन बेदादे ने सुप्रीमकोर्ट के उस ऑफर को ठुकरा दिया है | जिसमें कोर्ट ने कहा  था कि हम आपके लिए बुरा महशूस कर रहे है अतः यदि आप चाहे तो नौकरी ज्वाइन कर सकते है |

दरअसल आपको बता दें कि देश की सर्वोच्च न्यायालय ने सहानुभूति के आधार पर फिर से नौकरी पर आने के लिए कहा था लेकिन शमसुद्दीन ने सुप्रीमकोर्ट के उस ऑफर को ठुकरा दिया है और कहा है कि वह दाढ़ी के बगैर नौकरी नहीं कर सकता है | कोर्ट में बेदादे के वकील ने कहा है कि इस्लाम में अस्थाई दाढ़ी रखने की इज़ाज़त नहीं है |

क्या कहा जस्टिस खेहर ने –
प्राप्त जानकारी के आधार पर बताया जा रहा है कि कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया जेएसखेहर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की पीठ ने बेदादे से कहा है कि हम आपके लिए बुरा मह्शूश कर रहे है, आपको नौकरी नहीं छोडनी चाहिए यदि आप चाहे तो हम आपके लिए कुछ कर सकते है | लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि आप यह स्वीकार करें कि आप केवल कुछ धार्मिक मौकों को छोड़कर हर समय बिना दाढ़ी के रहेंगे, यह आपकी इच्छा के ऊपर है |

इस याचिका के दौरान बेदादे के वकील ने कहा है कि कॉन्सटेबल, बिना दाढ़ी के वो ठीक नहीं है | वकील की इस तर्क पर कोर्ट ने साफ़ कहा है कि फिर हम आपकी कोई भी मदद नहीं कर सकते है | इस दौरान बेदादे के वकील हनीफ ने कोर्ट से इस मामले में जल्द सुनवाई करने की अपील की थी लेकिन कोर्ट ने उसे ठुकरा दिया है | बेदादे ने अपनी याचिका में कहा है एक नागरिक अपने धर्म का पालन करने के लिए स्वतंत्र है और उसमें रिजर्व पुलिस बल के कमांडेंट हस्तक्षेप नहीं कर सकते या मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकते।

बेदादे को दी गई थी इजाजत गौरतलब है कि बेदादे को फोर्स में आने के बाद छंटी हुई और साफ दाढ़ी रखने की शर्त पर इजाजत दी गई थी, लेकिन बाद में कमांडेंट ने इस अनुमति को वापस लेकर अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरु कर दी। 12 दिसबंर 2012 को बेदादे के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी फैसला दिया। अदालत की ओर से कहा गया था फोर्स एक धर्मनिरपेक्ष एजेंसी है, ऐसे में अनुशासन का पालन करना आवश्यक है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि दाढ़ी रखना मौलिक अधिकार नहीं है, क्योंकि यह इस्लाम के उसूलों में शामिल नहीं है।

वकील ने दी थी दलील हाईकोर्ट से फैसला अपने खिलाफ आने के बाद बेदादे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। जनवरी 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने बेदादे के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी और तब से मामला सुनाई के लिए अटका पड़ा है। साल 2013 की सुनवाई में बेदादे के वकील ने 1989 में सैन्य बलों से जुड़े एक सर्कुलर के जरिए कहा था कि नियमों में दाढ़ी रखने की अनुमति दी गई है। साथ ही इस्लाम के हदीस का जिक्र करते हुए दलील दी थी कि दाढ़ी पैगंबर मोहम्मद की ओर से बताई गई जीवन शैली का मामला है।

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