पढ़ लेंगे गर पूरा तो प्रेम, आदर और सम्मान से आँखों से आशुओं की धारा बह जायेगी

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portrait-of-a-boy-with-his-father (photo credit -colourbox.com)जब मम्मी डाँट रहीं थी तो
कोई

चुपके से हँसा रहा था, वो थे पापा. . .
.
जब मैं सो रहा था तब

कोई
चुपके से सिर पर हाथ फिरा रहा था, वो थे पापा. . .
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जब मैं सुबह उठा
तो
कोई बहुत थक कर भी काम पर जा रहा था, वो थे पापा. . .
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खुद कड़ी धूप में
रह कर
कोई
मुझे ए.सी. में सुला रहा था, वो थे पापा. . .
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सपने तो मेरे थे पर उन्हें पूरा करने का रास्ता
कोई

और बताऐ जा रहा था, वो थे पापा. . .
.
मैं तो सिर्फ अपनी खुशियों में हँसता हूँ, पर मेरी हँसी देख कर
कोई
अपने गम भुलाऐ जा रहा था ,
वो थे पापा. . .
.
फल खाने की ज्यादा जरूरत तो उन्हें थी, पर
कोई

मुझे सेब खिलाए जा रहा था ,
वो थे पापा. . .
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खुश तो मुझे होना चाहिए कि वो मुझे मिले, पर मेरे जन्म लेने की खुशी
कोई

और मनाए जा रहा था
वो थे पापा. . .
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ये दुनिया पैसों से चलती है पर
कोई
सिर्फ मेरे लिए पैसे कमाए जा रहा था ,
वो थे पापा. . .
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घर में सब अपना प्यार दिखाते हैं पर
कोई
बिना दिखाऐ भी इतना प्यार किए जा रहा था
वो थे पापा. . .
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पेड़ तो अपना फल खा नही सकते इसलिए हमें देते हैं पर
कोई
अपना पेट खाली रखकर भी मेरा पेट भरे जा रहा था ,
वो थे पापा. . .
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मैं तो नौकरी के लिए घर से बाहर जाने पर दुखी था पर मुझसे भी अधिक आंसू
कोई

और बहाए जा रहा था
वो थे पापा. . .
.
मैं अपने “बेटा ” शब्द को सार्थक बना सका या नही यह तो पता नहीं पर
कोई
बिना स्वार्थ के अपने “पिता” शब्द को सार्थक बनाए जा रहा था
वो थे पापा. . .

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