मेरी कलम भी मेरे जज्बातों से हैं वाकिफ

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मेरे जज्बातों से इस कदर वाकिफ हैं मेरी कलम

मैं इश्क भी लिखना चाहूँ तो भी

इंकलाब लिख जाता हैं !

bhagat singh4

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