मेरी शिक्षा के लिए मेरा संघर्ष

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my study

जब मै 6th क्लास में थी मेरी पढ़ाई बंद करवा दी गई क्योंकि मेरे माँ-बाप को लगता था कि मेर अकेले स्कूल जाना सुरक्षित नहीं है और क्योंकि वो दोनों ही विकलांग थे वे मेरे साथ नहीं जा सकते थे | किसी तरह एक साल के बाद मैंने दोबारा पढ़ाई शुरू की पर मेरी 10वीं के दौरान मुझे एक और समस्या का सामना करना पड़ा क्योंकि इस बार मेरे पास मीर फीस देने के लिए 3000/- रुपए नहीं थे, अपनी बस्ती के शक्ति सर्किल की मदद से मैंने अपनी फीस के लिए IAPA से संपर्क किया और आश्चर्य की बात यह कि उन्होंने स्वीकृति दे दी | आप सोच भी नहीं सकते वो 3000/- रुपए मेरे लिए कितना मायने रखते थे ?

हम एक झुग्गी में रहते हैं और इतनी छोटी जगह में पांच लोगों के साथ रहकर पढना बहुत कठिन था, इसलिए परीक्षाओं के समय देर रात तक मै घर के बाहर एक छोटी सी मोटरसाइकिल बैठकर पढ़ती थी, वहां हर तरफ मक्खियाँ होती थीं पर मुझे किसी तरह काम चलाना पड़ता था और मै बहुत खुश हूँ की मैंने यह किया |

मै आज एक कॉलेज में आर्ट पढ़ रही हूँ यद्यपि मुझे अंग्रेजी पढने में कुछ दिक्कतें हैं पर मेरी शिक्षक ने मुझे हार न मानने का हौसला दिया मेरे सपने बहुत बड़े हैं और मै एक पत्रकार बनना चाहती हूँ ताकि झुग्गी बस्ती में रहने वाले बच्चों के प्रति जागरूकता फैला सकूँ……. आपके लिए जो साधारण ज़रूरते हैं हमारे लिए वही विलासिता है | मै दुनिया पर एक छाप छोड़ना चाहती हूँ, मै अपनी माँ के लिए एक्घ्र खरीदना चाहती हूँ ताकि जिंदगी में कभी तो ऐसा हो जब हमारी सुबह एक ऐसी जगह हो जिसे हम घर कह सकें |

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VIA – Humans Of Bombay

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