जिंदगी और मौत के बीच जी रही दरिंदगी का शिकार हुई नाबालिक किशोरी

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प्रतापगढ़(ब्यूरो)- दिल्ली की निर्भया के लिए पूरा देश एकजुट होकर आवाजें बुलंद कर रहा था। शायद उसे न्याय मिला की नही यह वह नही जान सकती। लेकिन क्या प्रतापगढ़ जनपद की इस निर्भया को न्याय मिल पायेगा, जिसका 10 दिनों तक जिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी मेडिकल परीक्षण नही हो सका। मामला महेशगंज थाना क्षेत्र का है जहाँ की एक दलित नाबालिक किशोरी का है। जिसको पड़ोसी गांव का एक युवक व उसके साथी उसे दिल्ली उठा ले जाते है और उसके साथ महीनो सामूहिक दुराचार करते है, फिर उसके बाद उसे दिल्ली रेलवे स्टेशन पर छोड़ देते है। नाबालिक किशोरी के साथ हैवानियत की दास्तां आज भी उसके शरीर पर बने जख्म बयां करते है।

किशोरी के मिलने की सूचना के बाद जब परिजन उसे थाने लेकर जाते है तो वहाँ पर सिर्फ एनसीआर दर्ज किया जाता है। और आरोपियों को पकड़ने की जगह उन्हें संरक्षण दिया जाता है। परिजन जब घायल किशोरी को जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराते है तो उन्हें नार्मल मरीज समझ कर सर्जिकल वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है। 10 दिन बीत जाने के बाद आज तक उसका मेडिकल परिक्षण नही हो सका है। मीडिया में मामला आने के बाद जब जिला अस्पताल के सीएम्एस से पूछा गया तो उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी ही नही थी। जब सीएम्ओ से इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटना है तो जाँच कर कार्यवाही की जायेगी। अधिकारियो के इस तरह के रवैये से परिजनों में खासा आक्रोश दिखाई दिया।

पीड़ित किशोरी के पिता छेदी लाल ने जिलाधिकारी महोदय को एक शिकायती पत्र के माध्यम से इस घटना के बारे में अवगत भी कराया गया । लेकिन उन्हें अब तक न्याय नही मिल सका। पीड़ित किशोरी के मामले में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री /स्वतन्त्र प्रभार मंत्री डा. महेंद्र से जब पूछा गया तो उन्होंने घटना की निंदा करते हुए बेहद शर्मनाक बताया और कहा की घटना में जो भी दोषी पाये जायेंगे उन्हें बख्शा नही जायेगा। इसकी हर स्तर पर जांच होगी। अब देखना होगा की बेल्हा की इस निर्भया को कब और कैसे न्याय मिलता है।

रिपोर्ट- डॉ. आर. आर. पाण्डेय

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