नागचंद्रेश्वर मंदिर, साल में सिर्फ एक ही दिन के लिए ही खुलता है, जानें क्यों

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nagchandreswar temple

दुनिया के सबसे प्राचीन धर्म हिन्दू में प्रारंभ से ही नागों की पूजा करने की परंपरा रही है | अगर हम हिन्दू परम्परा की बात करते है, हिन्दू धर्म और ईश्वर की बात करते है तो हम यह पाते है कि हिन्दुओं के प्रमुख देवताओं में से एक भगवान् भोलेनाथ के तो नाग आभूषण ही है | वे उनके गले की, भुजाओं की सोभा बढाते है |

आपको तो ज्ञात ही होगा कि भारत वर्ष में ऐसे अनेकों प्राचीन मंदिर है जहां हमेशा नागों की पूजा की जाती है लेकिन हम आपको बता दें कि उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर के दरवाजे भक्तों के लिए साल में केवल एक ही दिन नागपंचमी के ही दिन खुलते है | बताया जाता है कि इस मंदिर में आज भी नागराज तक्षत स्वयं ही विराजमान रहते है |

क्या है विशेष –
बता दें कि इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस नागचंद्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा है | इस प्रतिमा को देखते है तो पता चलता है कि यह पूरी दुनिया की इकलौती ऐसी मूर्ती है जहां पर नाग की सय्या पर भगवान् विष्णु नहीं बल्कि भगवान् भोलेनाथ सपरिवार विराजमान है |

पौराणिक मान्यता –
इस स्थान और इस मंदिर के साल में केवल एक दिन खुलने की बात करें तो यह देखने को मिलता है कि एक बार सर्प राज तक्षक ने भगवान् भोलेनाथ को प्रशन्न करने के लिए बहुत ही कठोर तपस्या कर डाली | बाद में भोले भंडारी प्रशन्न हो गए और उन्होंने तक्षक को अमरता का वरदान दे दिया | वरदान मिलने के बाद तक्षक ने कहा है कि प्रभु मै हमेशा आपके आस-पास ही रहना चाहता हूँ | भगवान् भोलेनाथ ने तथास्तु कह दिया | लेकिन तक्षक ने कहा है कि वे रहना तो यही चाहते है लेकिन उन्हें ज्यादातर समय एकांत चाहिए | तभी से वे इस मंदिर में निवास करते है और इस मंदिर को वर्ष में मात्र एक दिन नागपंचमी के लिए खोला जाता है |
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