पट्टी रायपुर रोड स्थित ईदगाह में ईद उल फितर की अदा की गई नमाज

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पट्टी/प्रतापगढ़ (ब्यूरो) ईद उल-फ़ित्र या ईद उल-फितर मुस्लमान रमज़ान उल-मुबारक के महीने के बाद एक मज़हबी ख़ुशी का तहवार मनाते हैं जिसे ईद उल-फ़ित्र कहा जाता है। ये यक्म शवाल अल-मुकर्रम्म को मनाया जाता है।

रमजान के आखिर में एक महत्वपूर्ण धार्मिक त्योहार आता है। ईद लोग तैयार होकर नए कपड़े पहन कर अपने दोस्तों, परिवारवालों और करीबी लोगों से मिलते हैं. लजीज पकवानों से भरी दावतों का आयोजन किया जाता है, लेकिन दुनिया भर में मनाए जाने वाले इस त्योहार की तारीख आख़िर कैसे निर्धारित की जाती है? बीबीसी उर्दू के अयमान ख़्वाजा और आमिर राविश ने इसके तरीके को आसान शब्दों में समझाने की कोशिश की है। दुनिया भर में रहने वाले लगभग दो अरब मुसलमान रमजान महीने के आख़िर में चाँद देखते हैं। 

मुसलमान चंद्र कैलेंडर (लूनर कैलेंडर) को मानते हैं। इस कैलेंडर में तारीख का निर्धारण चंद्रमा के अलग-अलग रूपों में दिखने के मुताबिक होता है। रमज़ान इस कैलेंडर के नौवें महीने में आता है। हर साल इस कैलेंडर में लगभग ग्यारह दिन का अंतर आता है. चंद्र कैलेंडर मुसलमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।इसी कैलेंडर और चंद्रमा को देखकर न केवल रमज़ान की तारीखों का निर्धारण किया जाता है बल्कि ईद किस दिन है इसका फैसला भी चाँद देखकर ही किया जाता है।

रिपोर्ट – सूरज वर्मा पट्टी

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