पर्यावरण मंत्रालय ने डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च फेलोशिप की घोषणा की

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The Minister of State for Environment, Forest and Climate Change (Independent Charge), Shri Prakash Javadekar visiting an exhibition, at the Prize distribution function of Wildlife Week, in New Delhi on October 14, 2015. 	The Secretary, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, Shri Ashok Lavasa is also seen.

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दिवंगत डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम के 85वें जन्मदिवस पर उनके नाम पर पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च फेलोशिप प्रारंभ करने की घोषणा की है। मंत्रालय का पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च फेलोशिप प्रोग्राम देश में पर्यावरण एवं पारिस्थितकी के क्षेत्र में काम कर रहे युवा वैज्ञानिकों की दिशा में लक्षित है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य समूह वे युवा वैज्ञानिक हैं जिन्होंने पर्यावरण एवं पारिस्थितकी के क्षेत्र में अपना पीएचडी पूरा कर लिया है या पूरा करने वाले हैं और जिनका एक बढिया शैक्षणिक रिकॉर्ड है। आवेदकों को 35 वर्ष की उम्र से कम आयु का होना चाहिए। फेलोशिप की अवधि तीन वर्ष की होगी और फेलोशिप अवार्ड में एक रिसर्च एसोसिएट के बराबर की एक मासिक फेलोशिप तथा 1.5 लाख रूपये की एक वार्षिक रिसर्च आकस्मिकता अनुदान शामिल है। मंत्रालय के दिशानिर्देश के अनुसार पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो रिसर्च एसोसिएटशिप के लिए लागू आवास किराया भत्‍ता एवं अन्‍य लाभ पाने का भी हकदार होगा।

मंत्रालय की योजना डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च फेलो के चयन के लिए डा. आर ए मशेलकर की अगुवाई में विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने की भी है। मंत्रालय फेलोशिप कार्यक्रम के लिए आवेदनों को आमंत्रित करने का आवेदन जल्द ही प्रकाशित करेगा और कार्यक्रम के लिए दिशा-निर्देश मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिये जाएंगे। नए फेलोशिप कार्यक्रम और वर्तमान में जारी नेशनल एनविरॉनमेंटल साइंसेज फेलो प्रोग्राम का मुख्य फोकस देश के स्थापित वैज्ञानिकों के संरक्षण के तहत अच्छे गुणवत्ता के वैज्ञानिक अनुसंधान शुरू करने के लिए पर्यावरण एवं पारिस्थितकी से संबंधित क्षेत्रों में काम कर रहे युवा वैज्ञानिकों के पोषण करने पर है।

आम लोगों के राष्ट्रपति डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम का देश के युवाओं की क्षमताओं पर अटूट विश्वास था और उन्हें भरोसा था कि देश के युवा भारत को एक वैश्विक शक्ति में रूपांतरित कर देंगे। उन्हें इस बात का भी पूरा यकीन था कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर्यावरण सुरक्षा एवं टिकाऊ विकास समेत देश के सामने खड़ी बड़ी चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं। डॉ कलाम ने विभिन्न अवसरों पर पर्यावरण एवं प्राकृतिक संरक्षण की सुरक्षा की जोरदार वकालत की थी जिससे कि आगे आने वाली पीढियों के सामने एक बेहतर भविष्य आ सके।

Source – PIB

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