सबसे बड़े रहस्य से उठ गया पर्दा, नेता जी के विमान दुर्घटना का रहस्य हो गया उजागर…

0
30216

Subhash Chandra Bose
ब्रिटेन की एक वेबसाइट www.bosefiles.info ने हाल ही में नेता जी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों के ऊपर से पर्दा उठाते हुए खुलासा किया है और उस दिन का पूरा विवरण अपनी वेबसाइट पर साझा किया है जिस दिन वह कथित विमान दुर्घटना हुई थी | जिसमें कहा जाता है कि नेता जिस सुभाष चंद्र बोस की मौत हो गयी थी | वेबसाइट ने विमान दुर्घटना वाले दिन के पूरे घटनाक्रम को उजागर करते हुए लिखा है कि उस दिन आखिर क्या हुआ था |

www.bosefiles.info ने नेता जी से सम्बंधित दस्तावेजों के हवाले से बताया है कि 18 अगस्त यानि आज ही के दिन वर्ष 1945 के प्लेन क्रैश से पहले नेता जी सुभाष चंद्र बोस कहा थे और उस दिन उन्होंने अपनी पूरी रात कहाँ गुजारी थी, वे कहा जाने की तैयारी कर रहे थे वेबसाइट ने नेता जी के उस दिन सम्बंधित और विमान दुर्घटना वाले दिन का पूरा विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है |

आखिर क्या हुआ था 18 अगस्त 1945 को –
वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक 18 अगस्त 1945 को नेता जी सुभाष चंद्र बोस एक जापानी बम वर्षक विमान से वियतनाम से टोरेन के लिए उड़ान भरी थी | इस विमान में उनके साथ 12 से 13 अन्य यात्री भी सवार थे और ये ज्यादातर जापानी सेना के अधिकारी थे | नेता जी के साथ नेता जी के एडीसी कर्नल हबीबुर रहमान भी उसी विमान में सवार थे | साथ ही विमान में जापानी आर्मी के लेफ्टिनेंट जनरल सुनाम्शा शिदेई भी थे | इस विमान को ताइवान के हितो से होते हुए ताइपे, डेरेन और फिर टोक्यो जाना था |
रिपोर्ट के मुताबिक उस दिन का मौसम उड़ान के बिलकुल अनुकूल था और उड़ान बेहद आसानी से हो सकती थी | भारत सरकार द्वारा वर्ष 1956 में गठित 3 सदस्यीय जांच समिति ने भी जांच की थी तो उसने भी यही कहा था कि मौसम उस दिन का बिलकुल ठीक था और जिस विमान से नेता जी और उनके अन्य साथी टोक्यो के लिए रवाना हो रहे थे वह विमान भी बिलकुल ठीक था |

रिपोर्ट में बताया गया है कि उस दिन नेता जी के साथ उस जहाज में जापानी एयर स्टाफ ऑफिसर मेजर टारो कोनो भी सवार थे | उन्होंने जांच समिति को बताया था कि उस दिन मुझे ऐसा लग रहा था कि जहाज का बाई तरफ का इंजन ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है और उसके बाद मै खुद विमान के भीतर गया था और मैंने इंजन का निरिक्षण किया था जिसके बाद मुझे यह पता चला कि नहीं विमान का इंजन ठीक तरह से और बिलकुल ठीक तरह से काम कर रहा था उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा था कि न ही केवल मैंने ही विमान का नीरिक्षण किया था बल्कि मेरे साथ एक इंजिनियर ने भी उनके साथ इंजन की जांच की थी जिसके बाद यह साफ़ हो गया था कि विमान का इंजन बलकुल ठीक है और वह पूरी तरह से उड़ान भरने के लिए तैयार है |

हालाँकि उन्होंने यह भी कहा था कि उस समय ग्राउंड पर मौजूद कैप्टन नाकामुरा एलियास यामामोटो इससे सहमत नहीं थे | उनका मानना था कि इंजन का बाया हिस्सा ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है लेकिन जहाज के पायलट ने बताया था कि जहाज का इंजन बिलकुल नया है और वह पूरी तरह से काम कर रहा है | फिर भी जहाज के कैप्टन ने 5 मिनट से ज्यादा समय तक जहाज के इंजन पर काम किया और उसके बाद उसने बताया था कि जहाज अब उड़ने के लिए बिलकुल तैयार है | इस पर मेजर ताकिजावा पूरी तरह से सहमत थे |

हालाँकि मेजर टारो कोनो ने बताया कि उसके बाद बस थोड़े ही समय तक उड़ान भरने के बाद ही विमान में विस्फोट हो गया | सुभाष चंद्र बोस के एडीसी कर्नल हबीब उर रहमान जो कि उस समय सुभाष बाबू के साथ ही उस विमान में सवार थे के अनुसार यह विस्फोट बहुत ही भयंकर था | रहमान ने बताया था कि ऐसा लग रहा था जैसे कि कोई तोप चली हो |

जिस समय यह भयंकर विस्फोट हुआ उस समय कैप्टन नाकामुरा ग्राउंड पर ही मौजूद थे उन्होंने सबकुछ होते हुए अपनी आँखों से ही | उन्होंने बताया था कि मैंने खुद अपनी आँखों से विमान को अपने सामने गिरते हुए देखा था | नाकामुरा के अनुसार जिस समय विमान क्रैश हुआ था वह महज 30 से 40 मीटर से ज्यादा की उंचाई पर नहीं था और वह रनवे से तक़रीबन 100 मीटर की दूरी पर गिरा था | उन्होंने कहा था कि विमान के गिरते ही विमान के आगे के हिस्से में आग लग गयी थी |

कर्नल रहमान ने बताया था कि जब विमान क्रैश हुआ था तब विमान के अन्दर बैठे नेता जी नेताजी मेरी ओर मुड़े | मैंने उनसे कहा कि आगे से निकलिए | पीछे से रास्ता नहीं है. हम मुख्य दरवाजे की ओर नहीं जा सके क्योंकि वह दूसरी चीजों और सामानों से जाम हो गया था | इसलिए नेताजी आग से होते हुए बाहर निकल गए | मैं भी उन्हीं लपटों से होते हुए बाहर आया | रहमान ने आगे बताया, ‘बाहर आते ही मैंने देखा कि वह मुझसे 10 यार्ड आगे खड़े हैं और मुझसे ठीक उलट पश्चिम की ओर देख रहे हैं. उनके कपड़ों में अभी भी आग लगी थी. मैं उनकी ओर तेजी से दौड़ा और उनके शर्ट बेल्ट को उनसे अलग करने में मुझे काफी दिक्कत हुई. उनके पैंट में आग नहीं लगी थी, इसलिए उसे उतारना बहुत जरूरी नहीं था | (कर्नल रहमान ऊनी यूनिफॉर्म में थे जबकि बोस खाकी रंग के सूती कपड़े पहने हुए थे. यह हालांकि केवल एक अनुमान है. इस आधार पर कि उनके कपड़ो में जल्दी आग लग गई थी) |’ कर्नल रहमान ने आगे बताया, ‘मैंने उन्हें जमीन पर लिटा दिया. तभी मैंने देखा कि उनके सिर पर गहरी चोट लगी थी. संभवत: उनके सिर के बाएं ओर | उनका चेहरा झुलस गया था | बालों में भी आग लगी थी और वे भी झुलस गए थे |

उन्होंने आगे बताया, ‘नेताजी ने हिंदुस्तानी भाषा में मुझसे पूछा- आपको ज्यादा तो नहीं लगी? मैंने कहा, मुझे लगता है कि मैं जल्द ही अच्छा महसूस करने लगूंगा. अपने बारे में उन्होंने तब कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि अब वे नहीं बचेंगे |

बोस ने आगे कहा, ‘जब अपने मुल्क वापस जाएं तो मुल्की भाईयों को बताना कि मैं आखिरी दम तक मुल्क की आजादी के लिए लड़ता रहा हूं | वो जंगे आजादी को जारी रखें. हिंदुस्तान जरूर आजाद होगा | उसे कोई गुलाम नहीं रख सकता |

लेफ्टिनेंट कर्नल शिरो नोनोगाकी भी उस फ्लाइट में थे. उन्होंने बताया, ‘प्लेन क्रैश के बाद जब मैंने पहली बार नेताजी को देखा तो वह प्लेन के बाएं विंग के बाएं छोर के आसपास कहीं खड़े थे. उनके कपड़ों में आग लगी थी और उनका कोई सहायक उस कोट को उनसे अलग करने की कोशिश कर रहा था |’

घायल होने के बाद नेता जी को तत्काल गंभीर अवस्था में तत्काल नजदीक के नैनमोन सैनिक अस्पताल में भर्ती कराया गया | उसके बाद नेता जी के साथ क्या हुआ इस संबंध में अभी तक कोई भी जानकारी वेबसाइट ने साझा नहीं की है हालाँकि वेबसाइट ने यह अपडेट अवश्य किया है कि नेताजी को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद क्या हुआ, इस बारे में वे जानकारी 16 जनवरी को प्रकाशित करेंगे |

हिंदी समाचार- से जुड़े अन्य अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज और आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here