नया खनन कानून ग्रामीणों के लिए बना अभिशाप

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बीघापुर/उन्नाव ब्यूरो : कोई भी कानून आमजनमानस को ध्यान में रखते हुए लोगो की सुविधा, सुरक्षा और हित के लिए बनाया जाता है, सभ्य समाज द्वारा उस कानून को लोगो का समर्थन भी प्राप्त होता है | आमजनमानस को जब किसी कानून से परेशानी होने लगे तो उस पर विचार करना पड़ता है |

हम बात कर रहे हैं खनन पर रोक की जिस पर सरकार ने जुर्माना पांच गुना बढ़ा दिया है, खनन माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को ऐसा कदम उठाना पड़ा पर वह कानून ग्रामीणों के लिए अभिशाप हो गया है, जिसके लिए ग्रामीण सरकार को कोष रहे हैं | गाँवो में बरसात के पहले कच्चे घरो की छत पर लोगो को मिटटी डालनी होती है जिससे बरसात में छत को बचाया जा सके गाँवो में इन्ही दिनों दरवाजे पर लोग मिट्टी डालते है क्योकि वर्ष भर में कई जगह गढ्ढे हो जाते हैं जिसके लिए मिट्टी की जरूरत होती है घर की कच्ची दीवारो में भी बरसात के पहले मिट्टी लगाने के लिए लोगो को मिट्टी की आवश्यकता होती है पर यह मिट्टी आये कहाँ से पहले लोग गाँवो में तालाबो या अपने खेतो से बैलगाड़ी द्वारा मिट्टी खोद कर बरसात के पहले यह काम कर लिया करते थे लेकिन अब बैलगाड़ी का युग समाप्त हो गया है और नए कानून के चलते ट्रैक्टरट्राली द्वारा कोई भी किसी की मिटटी लाने के लिए गाँवो में तैयार नहीं है |

अब इस कानून की वजह से गरीबो के कच्चे घर बरसात में ढहने वाले हैं, वहीं गाँवो में कुछ गरीबों ने पाई-पाई जोड़कर पक्की ईटो का एक कमरा तो बनवा लिया पर नींव में मिट्टी न होने की वजह से बरसात में वह भी जमीदोज हो सकते है, यह कानून भले ही खनन माफियाओ पर अंकुश लगाए पर ग्रामीण सरकार और इस कानून को कोष रहे हैं।

रिपोर्ट – मनोज सिंह

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